हाजिर चांदी के भाव में मामूली गिरावट, चेन्नई और हैदराबाद में चांदी अभी भी 2.50 लाख के पार

 




नई दिल्ली, 01 जनवरी (हि.स.)। साल 2026 के पहले दिन घरेलू सर्राफा बाजार में चांदी के भाव में मामूली कमजोरी दर्ज की गई है। आज इस चमकीली धातु की कीमत में 1,000 रुपये से लेकर 1,400 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट आई है। कीमत में आई इस गिरावट के बावजूद चेन्नई और हैदराबाद में ये चमकीली धातु अभी भी ढाई लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर के ऊपर बनी हुई है। देश के अलग अलग सर्राफा बाजारों में आज चांदी 2,38,700 रुपये प्रति किलोग्राम से लेकर 2,56,900 रुपये प्रति किलोग्राम तक के भाव पर बिक रही है।

दिल्ली में आज चांदी 2,38,900 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। इसी तरह मुंबई, अहमदाबाद और कोलकाता में चांदी 2,38,700 रुपये के भाव पर कारोबार कर रही है। जबकि जयपुर, सूरत और पुणे में चांदी 2,39,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बनी हुई है। वहीं बेंगलुरु में चांदी 2,39,200 रुपये के स्तर पर और पटना तथा भुवनेश्वर में 2,38,800 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है।

इसके अलावा हैदराबाद में चांदी 1,400 रुपये सस्ती होकर 2,56,800 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रही है। देश में चांदी की सबसे अधिक कीमत आज भी चेन्नई में है, जहां ये चमकीली धातु आज 1,400 रुपये कमजोर होकर 2,56,900 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। आपको बता दें कि 28 दिसंबर को चेन्नई में चांदी की कीमत 2,75,000 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी।

साल 2025 में चांदी की कीमत में 180 प्रतिशत से भी अधिक की तेजी आ गई थी। लंदन सिल्वर मार्केट में चांदी का हाजिर भाव 83.62 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया था, लेकिन रिकॉर्ड ऊंचाई पर शुरू हुई मुनाफा वसूली, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की बढ़ी उपलब्धता और भू-राजनीतिक तनाव में आई कमी की वजह से साल के आखिरी सप्ताह में इस चमकीली धातु की कीमत में गिरावट आनी शुरू हो गई। इसके साथ ही फ्यूचर ट्रेडिंग में सिल्वर फ्यूचर पर मार्जिन बढ़ा दिए जाने की वजह से चांदी पर दबाव की स्थिति बन गई।

कैपेक्स गोल्ड एंड इनवेस्टमेंट्स के सीईओ राजीव दत्ता के मुताबिक शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज ने कमोडिटी एक्सचेंज इंक (कॉमेक्स) और दूसरे डेरिवेटिव प्लेटफॉर्म्स पर मार्जिन में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। सिल्वर फ्यूचर ट्रेडिंग के लिए पहले जहां कारोबारियों को मार्जिन के रूप में जहां लगभग 20 हजार डॉलर देना पड़ता था, वो अब बढ़ कर लगभग 25 हजार डॉलर हो गया है। मार्जिन बढ़ने से कारोबारियों को तुलनात्मक रूप से अधिक राशि का भुगतान करने की मजबूरी बन गई, जिसकी वजह से कई बड़े कारोबारियों ने अपनी पोजिशन काटने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। इस बिकवाली ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजापर में चांदी की कीमत पर दबाव बना दिया, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी कीमत में आई गिरावट के रूप में नजर आ रहा है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक