बैंक ऑफ इंडिया और सी-डैक के बीच समझौता, क्वांटम तकनीक से बैंकिंग को सुरक्षित व आधुनिक बनाने पर जोर

 




नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (हि.स.)। बैंकिंग क्षेत्र में उभरती तकनीकों के इस्तेमाल, साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप वित्तीय सेवाओं को विकसित करने के लिए बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य क्वांटम तकनीक और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं को अधिक सुरक्षित, सक्षम और तकनीकी रूप से उन्नत बनाना है।

यह समझौता इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सी-डैक और बैंक ऑफ इंडिया के बीच संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी विकास, प्रायोगिक परियोजनाओं, तकनीक के प्रदर्शन और क्षमता निर्माण के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करेगा। इसके तहत बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र से जुड़े ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां नई तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस साझेदारी का प्रमुख उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र में नवाचार के लिए क्वांटम इकोसिस्टम विकसित करना है। क्वांटम तकनीक भविष्य में बैंकिंग सुरक्षा, डेटा संरक्षण और जटिल वित्तीय निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए दोनों संस्थान क्वांटम-प्रेरित तकनीकों और क्वांटम-सुरक्षित समाधानों की संभावनाओं का अध्ययन करेंगे।

क्वांटम-सुरक्षित तकनीकों का उद्देश्य भविष्य में उभरने वाले ऐसे साइबर सुरक्षा खतरों से वित्तीय प्रणालियों की रक्षा करना है, जो पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं के लिए चुनौती बन सकते हैं। इस सहयोग के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा, विश्वसनीयता और संकटों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। समझौते के तहत सहयोग केवल क्वांटम तकनीक तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ब्लॉकचेन, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसी तकनीकों को भी शामिल किया गया है।

संभावित उपयोग के क्षेत्रों में दस्तावेजों की बुद्धिमत्तापूर्ण प्रोसेसिंग, ग्राहकों और कर्मचारियों की सहायता के लिए एआई आधारित प्रणाली, धोखाधड़ी का विश्लेषण, ऋण संबंधी मूल्यांकन, वित्तीय विश्लेषण, सुरक्षित एआई प्लेटफॉर्म, डिजिटल पहचान, सुरक्षित डेटा साझाकरण और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट शामिल हैं। इन तकनीकों के जरिए बैंकिंग प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने और जोखिमों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

सी-डैक और बैंक ऑफ इंडिया मिलकर बैंकिंग क्षेत्र के लिए प्राथमिकता वाले उपयोग के मामलों की पहचान करेंगे। इसके बाद सुरक्षित परीक्षण वातावरण में प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट तैयार किए जाएंगे। इन परीक्षणों के जरिए नई तकनीकों की व्यावहारिक उपयोगिता, तकनीकी व्यवहार्यता और संभावित लाभ का आकलन किया जाएगा। साथ ही, नए समाधानों के प्रदर्शन की मौजूदा प्रणालियों से तुलना की जाएगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने इस पहल के लिए बैंक ऑफ इंडिया को बधाई दी और स्वदेशी तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सी-डैक के साथ उसके सहयोग की सराहना की। उन्होंने बढ़ती साइबर सुरक्षा चिंताओं और उभरते तकनीकी खतरों के दौर में क्वांटम-प्रतिरोधी वित्तीय इकोसिस्टम तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र को क्वांटम युग की चुनौतियों और संभावनाओं के लिए तैयार करना महत्वपूर्ण है।

समझौता ज्ञापन का औपचारिक आदान-प्रदान सी-डैक मुंबई के कार्यकारी निदेशक आदित्य कुमार सिन्हा और बैंक ऑफ इंडिया के सीजीएम आईटी एवं सीआईओ सत्येंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन, बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक राजीव मिश्रा, मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुदीप श्रीवास्तव, सी-डैक के महानिदेशक ई. मघेश और दोनों संस्थानों तथा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सौरव राय