ऑटो पीएलआई योजना पर डीप-टेक स्टार्टअप इंडस्ट्री ने उठाए सवाल
नई दिल्ली, 23 फरवरी (हि.स.)। देश की डीप-टेक कंपनियों के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) स्टार्टअप ने भारी उद्योग मंत्रालय से मांग की है कि बजट में आवंटित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई स्कीम) के फंड का पूरा उपयोग किया जाए। ईवी स्टार्टअप का कहना है कि पिछले साल घोषित पीएलआई स्कीम के फंड का केवल 10 प्रतिशत ही वास्तव में उपयोग किया गया, वह भी कुछ खास उद्योगों को ही इसका फायदा मिला। इस कारण उत्पादन प्रोत्साहन को बल नहीं मिला। 2026-27 के बजट में पीएलआई स्कीम के लिए 5939 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ईवी स्टार्टअप का कहना है कि यदि इस फंड का उपयोग सही से हो जाए तो भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों और उससे जुड़े उद्योगों में जबरदस्त तेजी आ सकती है।
2026 की शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, ईवी स्टार्टअप के लिए पीएलआई योजनाओं के तहत धन का उपयोग काफी कम रहा। अनुमान के मुताबिक आवंटित राशि का लगभग 10 प्रतिशत ही वितरित हो सका, उसमें भी एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) बैटरी के क्षेत्र में तो आवंटन लक्ष्य का केवल 2.8 प्रतिशत ही प्रोत्साहन राशि का वितरण हो सका। बजट बढ़ोतरी के बावजूद वित्त वर्ष 2026 के अंत तक पीएलआई योजना राशि का केवल 12 प्रतिशत ही उपयोग हो पाएगा। ईवी स्टार्टअप का कहना है कि केवल आवंटन बढ़ाने से इस इंडस्ट्री में तेजी नहीं आएगी। जब तक फंड का एक बड़ा हिस्सा ईवी स्टार्टअप के पास नहीं पहुंचता तब तक प्रतिस्पर्धा में भारतीय कंपनियां टिक नहीं पाएंगी। इस समय तो कुछ स्थापित खिलाड़ियों को ही केवल फायदा हो रहा है।
यूलर मोटर्स के संस्थापक एवं सीईओ सौरव कुमार का कहना है कि कमर्शियल ईवी सबसे अधिक रिटर्न प्रदान करते हैं। फिर भी पीएलआई के तहत इस सेक्टर को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। अभी भी बड़े पारंपरिक ओईएम को ही प्राथमिकता दी जा रही है। इस क्षेत्र में रोजगार सृजन को गति देने के लिए पीएलआई के ढांचे में बदलाव करना जरूरी है। टर्नओवर-आधारित मानकों से हटाकर वास्तविक ईवी बिक्री के आकड़े को आधार बनाया जाना चाहिए।
रिवर मोबिलिटी के सह संस्थापक एवं सीईओ रविंद मणि का कहना है कि देश के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर स्थायी क्षमता निर्माण है। भारत को ईवी उद्योग का वैश्विक केंद्र बनाने के नवोन्मेषकों को समर्थन करना ही चाहिए। तभी भारत एक सच्चा ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद