घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ के दाम में बढ़ोतरी पर सरकार ने दी सफाई

 


नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि.स)। पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक कच्चे तेल के दाम में उछाल के कारण विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमत में भारी इजाफा को लेकर फैले भ्रम पर केंद्र सरकार और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने स्थिति को स्प्ष्ट किया है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने सफाई दी है कि घरेलू एयरलाइंस कपनी के लिए विमानन टरबाइन ईंधन में 115 फीसदी नहीं, बल्कि सिर्फ 8.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के दाम में बढ़ोतरी पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में इजाफा के चलते एटीएफ की कीमतें बढ़ी है। एटीएफ की कीमतें दोगुना होना तय थी, लेकिन नागर विमानन मंत्रालय के आग्रह पर बढ़ोतरी टाला गया है। अब एयरलाइन पर मात्र 25 फीसदी का बोझ बढ़ेगा। हालांकि, विदेशों में जाने वाली एयरलाइंस को बढ़ोतरी की पूरी कीमत देनी होगी।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत में एटीएफ की कीमतें 2001 में नियंत्रण-मुक्त कर दी गई थीं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के एक फ़ॉर्मूले के आधार पर हर महीने इनमें बदलाव किया जाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में असाधारण स्थिति के कारण 1 अप्रैल को घरेलू बाजारों के लिए एटीएफ की कीमतों में 100 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी होने की उम्मीद थी। मंत्रालय ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस विपणन कंपनियों ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के परामर्श से एयरलाइनों पर मात्र 25 फीसदी (केवल 15 रुपये प्रति लीटर) की आंशिक और चरणबद्ध बढ़ोतरी ही लागू की है। हालांकि, विदेशी मार्गों पर एटीएफ की कीमतों में पूरी बढ़ोतरी का भुगतान करना होगा, जैसा कि वे दुनिया के अन्य हिस्सों में करते हैं।

नागर विमानन मंत्रालय मंत्री के. राममोहन नायडू ने बुधवार को कहा कि विमान ईंधन की कीमतों में आंशिक एवं चरणबद्ध बढ़ोतरी लागू करने के फैसले से यात्रियों को हवाई किराए में तेज वृद्धि से बचाने में मदद मिलेगी। नायडू ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में एविएशन सेक्टर की स्थिरता बनी रहेगी। साथ ही इस फैसले से कार्गो मूवमेंट और व्यापार-लॉजिस्टिक्स के लिए जरूरी एयर कनेक्टिविटी भी सुचारू बनी रहेगी, जिससे व्यापक अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर