विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि रुझान जनवरी-मार्च तिमाही में सकारात्मक : फिक्की सर्वे

 


नई दिल्ली, 06 मई (हि.स)। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच बढ़ती लागत एवं वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में भारत के विनिर्माण क्षेत्र का वृद्धि रुख सकारात्मक बना रहा। वहीं, निर्यात और निवेश का परिदृश्य स्थिर बना हुआ है।

भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) ने बुधवार को जारी एक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी। उद्योग मंडल फिक्की के नवीनतम मैन्युफैक्चरिंग सर्वे से पता चलता है कि 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए विकास की भावना सकारात्मक है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान उत्पादन स्तर में मजबूती देखने को मिली है।

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 93 फीसदी कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में उत्पादन को पिछले स्तर के बराबर या उससे अधिक बताया जबकि तीसरी तिमाही में यह आंकड़ा 91 फीसदी था। घरेलू मांग को लेकर भी कंपनियों का भरोसा कायम रहा और 89 फीसदी प्रतिभागियों ने बेहतर या समान ऑर्डर मिलने की उम्मीद जताई।

फिक्की सर्वेक्षण के मुताबिक हालांकि क्षमता उपयोग में हल्की गिरावट दर्ज की गई और यह पिछली तिमाही की तुलना में घटकर करीब 72 फीसदी रह गया। इसके बावजूद अगले छह महीनों के लिए निवेश का दृष्टिकोण स्थिर बना हुआ है और कंपनियां विस्तार की योजना बना रही हैं। सर्वेक्षण में शामिल 250 से अधिक विनिर्माण इकाइयों (बड़ी और एमएसएमई दोनों) का कुल वार्षिक कारोबार आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें वाहन, पूंजीगत उत्पाद, रसायन, उर्वरक एवं फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनी उपकरण, धातु और वस्त्र जैसे आठ प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार लागत का दबाव इस तिमाही में और बढ़ गया। करीब 70 फीसदी कंपनियों ने बिक्री के अनुपात में उत्पादन लागत बढ़ने की बात कही, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 57 फीसदी था। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि, रुपये में गिरावट और लॉजिस्टिक, बिजली एवं अन्य उपयोगिता खर्चों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रहे।

इसके बावजूद आधे से अधिक कंपनियां अगले छह महीनों में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही हैं। हालांकि, विस्तार के रास्ते में भू-राजनीतिक हालात (सीमा शुल्क, व्यापार प्रतिबंध), श्रम से जुड़े मुद्दे, कच्चे माल की कमी और नियामकीय चुनौतियां प्रमुख बाधाएं बनी हुई हैं।

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक करीब 60 फीसदी कंपनियां भविष्य में तेज वृद्धि की उम्मीद कर रही हैं। उन्होंने मशीनरी क्षेत्र में प्रौद्योगिकी साझेदारी, शोध एवं विकास के लिए प्रोत्साहन, स्थानीय विनिर्माण क्लस्टर को समर्थन और निर्यात बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन जैसी नीतिगत पहलों की सिफारिश की है।

इसके अलावा श्रम की उपलब्धता के मामले में स्थिति अपेक्षाकृत संतोषजनक रही। करीब 79 फीसदी कंपनियों ने कहा कि उन्हें श्रमिकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ रहा है, जबकि 21 फीसदी ने कुशल श्रमिकों की कमी को एक चुनौती बताया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर