काशी में गंगा में योग, नावों पर बैठकर साधना में लीन हुए योग प्रेमी
वाराणसी। आध्यात्मिक नगरी काशी में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न स्थानों के साथ-साथ गंगा तट और घाटों पर भी बड़े पैमाने पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान सबसे आकर्षक दृश्य तब देखने को मिला जब गंगा नदी के बीच नावों और बजड़ों पर सवार होकर लोग योग और ध्यान की साधना करते नजर आए। गंगा की शांत लहरों के बीच किया गया यह योगाभ्यास लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर काशी में सुबह से ही उत्साह का माहौल था। शहर के सभी प्रमुख घाटों सहित 84 घाटों पर बड़ी संख्या में लोग विभिन्न योग मुद्राओं में अभ्यास करते दिखाई दिए। एक ओर नगर निगम द्वारा संपूर्णानंद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किया गया, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने नमो घाट पर सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।

गंगा के मध्य नावों पर आयोजित योग कार्यक्रम ने योग दिवस को विशेष आयाम प्रदान किया। प्रतिभागियों ने ध्यान, प्राणायाम और विभिन्न योगासनों का अभ्यास करते हुए योग के महत्व को रेखांकित किया। योग साधकों का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर हुई थी और यह काशी के लिए गर्व की बात है कि वे यहां के सांसद भी हैं। ऐसे में काशी से विश्व को योग, स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता का संदेश देने का प्रयास किया गया।
योग गुरु ने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ और सकारात्मक मन का निवास होता है। योग न केवल शरीर को निरोग रखने का माध्यम है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन प्राप्त करने का भी प्रभावी मार्ग है। उन्होंने कहा कि योग को केवल एक दिवस तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने लोगों से प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योग और ध्यान के लिए निकालने का आग्रह किया। उनका कहना था कि नियमित योगाभ्यास से कई शारीरिक और मानसिक बीमारियों से बचाव संभव है। ध्यान की अवस्था में व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है और उसकी आंतरिक ऊर्जा जागृत होती है। गंगा की गोद में आयोजित इस अनूठे योग कार्यक्रम ने काशी की आध्यात्मिक विरासत और योग की वैश्विक महत्ता को एक बार फिर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

