भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संगम का बनेगा मंच, विज्ञान भारती राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारियां शुरू

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वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन परिसर में मंगलवार को विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन के आयोजन स्थल का भूमि पूजन एवं विधिवत शुभारंभ किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम के साथ ही आगामी राष्ट्रीय अधिवेशन की औपचारिक तैयारियों का शुभारंभ हो गया। आयोजन समिति ने अधिवेशन की सफलता एवं राष्ट्रहित में इसके सकारात्मक परिणामों की कामना की।

विज्ञान भारती के पदाधिकारियों के अनुसार यह राष्ट्रीय अधिवेशन भारतीय वैज्ञानिक परंपरा, ज्ञान-विज्ञान की प्राचीन विरासत तथा आधुनिक वैज्ञानिक शोध एवं तकनीकी विकास के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। संगठन का उद्देश्य वेदमूलक वैज्ञानिक चिंतन को समकालीन विज्ञान के साथ जोड़ते हुए भारतीय ज्ञान प्रणाली को वैश्विक स्तर पर सशक्त पहचान दिलाना है।

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भूमि पूजन कार्यक्रम में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार एवं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना कर अधिवेशन की सफलता की कामना की। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान का समन्वय भविष्य के वैज्ञानिक विकास तथा राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़ने पर भी बल दिया।

कार्यक्रम में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री प्रवीण रामदास, क्षेत्रीय संगठन मंत्री अंकित, काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी, आईआईटी-बीएचयू के प्रो. संजय शर्मा, प्रो. राजेश कुमार सहित अनेक शिक्षाविद, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

आयोजन समिति ने बताया कि विज्ञान भारती का राष्ट्रीय अधिवेशन प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित किया जाता है। इस सम्मेलन में देश और विदेश से लगभग 1500 वैज्ञानिक, शोधार्थी, शिक्षक, तकनीकी विशेषज्ञ, नीति निर्माता तथा विद्यार्थी भाग लेते हैं। अधिवेशन न केवल संगठन की विगत गतिविधियों की समीक्षा का मंच होता है, बल्कि आगामी वर्षों की कार्ययोजना और वैज्ञानिक दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
 

इस वर्ष आयोजित होने वाले अधिवेशन का केंद्र बिंदु तीन प्रमुख विषय होंगे- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं नैतिकता (AI & Ethics), वन हेल्थ (One Health) तथा नेट जीरो (Net Zero)। इन विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक परिचर्चाएं, तकनीकी प्रस्तुतियां, प्रदर्शनी और संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके माध्यम से वर्तमान वैश्विक चुनौतियों, पर्यावरणीय संतुलन, स्वास्थ्य सुरक्षा और तकनीकी विकास से जुड़े मुद्दों पर व्यापक मंथन किया जाएगा।

वक्ताओं ने कहा कि यह अधिवेशन केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक चेतना और नवाचार की भावना को एक मंच पर लाने का प्रयास है। आयोजन समिति के अनुसार 13 और 14 जून 2026 को वाराणसी में आयोजित होने वाला यह राष्ट्रीय अधिवेशन देश के प्रमुख वैज्ञानिक आयोजनों में से एक होगा, जिसकी तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं।

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