वाराणसी : सहस्त्र चंडी महायज्ञ में मां कमलात्मिका की विशेष पूजा, आहुतियों से की गई लोकमंगल की कामना
वाराणसी। सहस्त्र चंडी महायज्ञ के दसवें दिन दस महाविद्याओं में दसवीं महाविद्या के रूप में पूजित मां कमलात्मिका (कमला) की विधिवत आराधना की गई। यज्ञ वेदी पर विशेष पूजन सामग्री से देवी का आवाहन एवं पूजन करने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन में विशेष आहुतियां समर्पित की गईं। इस दौरान विश्व कल्याण, राष्ट्र की समृद्धि, समाज में सुख-शांति तथा श्रद्धालुओं के जीवन में मंगल एवं ऐश्वर्य की कामना की गई।

धार्मिक मान्यता के अनुसार मां कमलात्मिका को समृद्धि, ऐश्वर्य, वैभव एवं भौतिक सुख-सुविधाओं की अधिष्ठात्री माना जाता है। कमल पर विराजमान मां कमला शांति, सौभाग्य, संपन्नता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती हैं। यज्ञ में उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक देवी के दर्शन-पूजन किए और विश्व शांति एवं जनकल्याण के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की साधना परंपरा में महाविद्याओं का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मां कमला केवल भौतिक संपन्नता की देवी नहीं हैं, बल्कि जीवन में संतुलन, सद्बुद्धि, संतोष और धर्मसम्मत समृद्धि की प्रेरणा भी प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ एवं देवी उपासना का मूल उद्देश्य व्यक्तिगत कल्याण के साथ समस्त प्राणी जगत के कल्याण की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सहस्त्र चंडी महायज्ञ में प्रतिदिन देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के माध्यम से शक्ति के विविध आयामों का स्मरण किया जा रहा है। मां कमलात्मिका की उपासना से समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव और लोकमंगल की भावना का विस्तार हो, यही अनुष्ठान की प्रमुख कामना है।
पूजन के दौरान संत-महंतों ने यज्ञ की परिक्रमा की और हवन में आहुतियां अर्पित कीं। भगवती देवी का षोडशोपचार विधि से पूजन-अर्चन एवं वंदन किया गया। आयोजन में विनय मिश्रा, पन्नालाल मिश्र भदोही से सपत्नीक, सरोज अग्रवाल बलिया से सपत्नीक सहित महंत अवध बिहारी दास, महंत रामेश्वर दास, महंत विद्याभूषण दास, महंत कोतवाल श्री मोहन दास, महंत भगवान दास, बृजभूषणानंद, रामलखन नागा और सच्चिदानंद तिवारी आदि संत-महंत एवं श्रद्धालु शामिल हुए।
यज्ञाचार्य तेजमणि तिवारी के मार्गदर्शन में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। आगामी दिनों में भी सहस्त्र चंडी महायज्ञ के तहत विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न होंगे। आयोजन स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर यज्ञ में सहभागिता कर रहे हैं।

