वाराणसी : समाजसेवी ने वृद्धाश्रम में मनाई होली, बुजुर्ग माताओं संग बांटी खुशियां

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वाराणसी। रंगों के महापर्व होली पर काशी में सामाजिक सरोकार की अनूठी मिसाल देखने को मिली। दुर्गाकुंड स्थित राजकीय वृद्ध एवं अशक्त महिला आश्रम में समाजसेवियों ने बुजुर्ग महिलाओं के साथ होली मनाकर उनके जीवन में खुशियों के रंग भरने का प्रयास किया। इस अवसर पर आश्रम की माताओं को अंगवस्त्र, मिष्ठान और अबीर-गुलाल भेंट किए गए, जिससे उनके चेहरे खिल उठे।

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कार्यक्रम का नेतृत्व दुर्गा मंदिर वाराणसी के महंत कौशलपति द्विवेदी एवं समाजसेवी अश्वनी शुक्ला ने किया। दोनों ने आश्रम पहुंचकर वहां रह रही महिलाओं को होली की शुभकामनाएं दीं और उनके साथ उत्सव मनाया। वातावरण में अपनापन और भावुकता का संगम देखने को मिला।

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महंत कौशलपति द्विवेदी ने कहा कि वर्षों से वे अपने परिवार के साथ होली मनाते आए हैं, लेकिन इस बार उन्होंने सोचा कि समाज में ऐसे लोग भी हैं जो अपनों से दूर हैं और त्योहारों पर अकेलापन महसूस करते हैं। इसी भावना के साथ वे वृद्धाश्रम पहुंचे। उन्होंने कहा कि माताओं को भेंट स्वरूप जो भी संभव था, वह अर्पित किया गया और उनके आशीर्वाद से मन अत्यंत आनंदित हुआ। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे आगे भी इन माताओं की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे।

समाजसेवी अश्वनी शुक्ला ने बुजुर्ग महिलाओं को टीका लगाकर आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि आश्रम की स्थिति देखकर मन द्रवित हो गया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जो संतान अपने माता-पिता का सम्मान नहीं कर पाती, वह जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।

अश्वनी शुक्ला ने आश्रम की माताओं के लिए हर संभव सहयोग देने का संकल्प लिया और कहा कि वे तन, मन और धन से उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने प्रार्थना की कि बाबा विश्वनाथ उन्हें इतनी शक्ति दें कि वे निरंतर सेवा कर सकें। कार्यक्रम के दौरान बुजुर्ग महिलाओं ने भी होली के गीत गुनगुनाए और मिठाइयां बांटकर खुशियां साझा कीं। यह आयोजन केवल एक पर्व मनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को यह संदेश दे गया कि त्योहारों की सच्ची खुशी तभी है, जब उसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी हो।

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