स्वच्छता सर्वेक्षण में चमका वाराणसी, ग्रामीण सर्वेक्षण 2025 में यूपी और सेंट्रल जोन में पहला स्थान

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वाराणसी। ग्रामीण क्षेत्रों ने स्वच्छता के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 में उत्तर प्रदेश तथा सेंट्रल ज़ोन में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस सफलता पर मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह ने जनपदवासियों, ग्राम प्रधानों, सफाई मित्रों और संबंधित कर्मचारियों को बधाई देते हुए इसे सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।

सीडीओ प्रखर कुमार सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन तथा मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त के निर्देशन में जिले ने यह महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। उन्होंने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण के तहत गांवों का मूल्यांकन चार प्रमुख आधारों पर किया जाता है। इनमें थर्ड पार्टी एजेंसी द्वारा गांवों का सर्वेक्षण, सेवा स्तरीय प्रगति, नागरिकों से प्राप्त फीडबैक और अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्रों की कार्यक्षमता का आकलन शामिल है।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है। जनपद में 704 से अधिक सामुदायिक शौचालय तथा 694 से अधिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र यानी आरआरसी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। गांवों में घर-घर से ई-रिक्शा के माध्यम से कूड़ा एकत्रित कर आरआरसी सेंटर तक पहुंचाया जाता है, जहां प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट के जरिए उसके निस्तारण की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा जैविक कचरे के प्रबंधन के लिए नाडेप पिट और कंपोस्ट पिट का भी प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।

तरल अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में भी वाराणसी ने उल्लेखनीय कार्य किया है। जिले में 5000 से अधिक सोख पिट और फिल्टर चैंबर बनाए गए हैं, जिससे गांवों में जल निकासी और स्वच्छता व्यवस्था बेहतर हुई है। वहीं पिछले वर्ष शुरू किए गए फ्लोटिंग वेटलैंड ट्रीटमेंट अभियान को भी काफी सराहना मिली थी। इस पहल के तहत 120 से अधिक वेटलैंड चिन्हित कर उनमें कैना प्लांट के माध्यम से सफाई अभियान चलाया गया था। इस मॉडल को बाद में अन्य जिलों ने भी अपनाया।

सीडीओ ने उम्मीद जताई कि ग्रामवासियों और सफाई मित्रों का सहयोग आगे भी इसी तरह मिलता रहेगा तथा सभी मिलकर वाराणसी को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

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