वाराणसी : नृत्य और अभिनय से मंच पर जीवंत हुई रामायण, ‘श्री राम चरितम्’ ने बांधा समां, श्रीराम के त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा का भावपूर्ण चित्रण
वाराणसी। सावित्रीबाई फुले सभागार में शनिवार को नृत्य, संगीत और अभिनय के जरिए प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र की मनोहारी प्रस्तुति हुई। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), लखनऊ और महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में होराइजन श्रृंखला के अंतर्गत नृत्य नाटिका ‘श्री राम चरितम्’ का आयोजन किया गया। डॉ. रंजना उपाध्याय के निर्देशन में कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से जोड़ दिया।

शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों ने नृत्य और अभिनय के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन के विभिन्न भावों को मंच पर साकार किया। उनकी भाव-भंगिमाओं, नृत्य कौशल और सधे हुए अभिनय ने सभागार में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के दौरान कलाकारों ने श्रीराम के आदर्श व्यक्तित्व और जीवन मूल्यों को कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से सामने रखा।

नृत्य नाटिका में श्रीराम के चरित्र से जुड़े आदर्शों, मर्यादा, त्याग, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और धर्म के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को प्रमुखता से दर्शाया गया। कलाकारों ने अपनी सामूहिक प्रस्तुति के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया कि प्रभु श्रीराम का जीवन केवल धार्मिक आस्था का आधार नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और आदर्श जीवन पद्धति की भी प्रेरणा है।

कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कलाओं और पौराणिक आख्यानों को मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा। होराइजन श्रृंखला के तहत आयोजित इस कार्यक्रम ने भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को अभिव्यक्ति का मंच प्रदान किया।
डॉ. रंजना उपाध्याय के निर्देशन में कलाकारों के तालमेल, भावपूर्ण अभिनय और नृत्य संयोजन ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया। कार्यक्रम के माध्यम से दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के उस आदर्श स्वरूप से रूबरू होने का अवसर मिला, जिसमें मर्यादा, सेवा, त्याग और धर्म को जीवन का आधार माना गया है।

