वाराणसी : मातृ दिवस पर वृद्धाश्रम में छलका अपनापन, महिला भूमिहार समाज ने बांटी खुशियां

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वाराणसी। मातृ दिवस के अवसर पर सारनाथ स्थित वृद्धजन आवास वृद्धाश्रम में महिला भूमिहार समाज द्वारा भावनात्मक और सेवा भाव से ओतप्रोत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज की सदस्याओं ने वृद्ध माताओं के साथ समय बिताकर उन्हें सम्मान, स्नेह और अपनत्व का एहसास कराया। कार्यक्रम में माताओं के चेहरे पर मुस्कान लाने और उन्हें परिवार जैसा माहौल देने का प्रयास किया गया।

महिला भूमिहार समाज की संस्थापिका डॉ. राजलक्ष्मी राय ने कहा कि मां ईश्वर का सबसे सुंदर स्वरूप होती है और मनुष्य जीवनभर मातृ ऋण से मुक्त नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मां केवल जन्म ही नहीं देती, बल्कि वह अपने निस्वार्थ प्रेम, त्याग और संस्कारों से पूरे परिवार को संवारती है। जीवन के अंतिम पड़ाव में जब कई माताएं अपनों के साथ और स्नेह की कमी महसूस करती हैं, तब उनके बीच बैठकर कुछ पल बिताना ही सच्ची सेवा और मानवता है।

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कार्यक्रम के दौरान समाज की सदस्याओं ने वृद्ध माताओं को भोजन कराया और उनके साथ भजन-कीर्तन कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आत्मीय संवाद और स्नेहपूर्ण व्यवहार से वृद्धाश्रम में रह रही माताओं को परिवार जैसा माहौल देने का प्रयास किया गया। कई माताएं भावुक हो उठीं और उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। इस अवसर पर मशहूर शायर मुनव्वर राना की पंक्तियां भी लोगों की जुबां पर रहीं  “इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।”

गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए महिला भूमिहार समाज की सदस्य किरण सिंह ने वृद्धजन आवास में माताओं की सुविधा के लिए सप्रेम कुलर भेंट किया। इस पहल की सभी ने सराहना की। कार्यक्रम में डॉ. राजलक्ष्मी राय, पूनम सिंह, डॉ. मंजुला चौधरी, शकुंतला राय, वंदना सिंह, सोनी राय, विजयता राय, प्रतिमा सिंह, चंद्रकला राय, सरिता राय, बबीता राय, उमा, अनिता, सीमा, सौम्या, विनीता, प्रिया, सुषमा, उर्मिला, अंबू, स्वर्णा, सुमन, मधु सहित बड़ी संख्या में सदस्याएं उपस्थित रहीं।

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