वाराणसी : मनरेगा बचाओ अभियान के तहत मजदूर पंचायत, योजना को बताया ग्रामीण महिलाओं की जीवनरेखा
वाराणसी। मिर्जामुराद क्षेत्र के कल्लीपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में शुक्रवार को मनरेगा मजदूर यूनियन के बैनर तले ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ के अंतर्गत मजदूर पंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष मजदूर शामिल हुए और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में प्रस्तावित बदलावों का विरोध किया।
संदीप पाण्डेय ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में खासकर महिलाओं के लिए जीवनरेखा के समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण गरीबों की आजीविका प्रभावित होगी। उनका कहना था कि सरकार को मनरेगा की मूल भावना को अक्षुण्ण रखते हुए किसी भी प्रकार के प्रतिकूल संशोधन को तत्काल वापस लेना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने ‘विकसित भारत-ग्राम-जी अधिनियम’ के प्रस्तावित प्रावधानों और मनरेगा के नाम व स्वरूप में बदलाव के विरोध में केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मजदूरों ने कहा कि रोजगार गारंटी से जुड़े अधिकारों में किसी भी तरह की कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी।
मनरेगा मजदूर यूनियन के संयोजक सुरेश राठौर ने कहा कि यह योजना ग्रामीण गरीब परिवारों के लिए आय का प्रमुख स्रोत है। यदि इसमें बदलाव किए जाते हैं, तो सबसे अधिक असर महिलाओं और कमजोर वर्गों पर पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि सरकार श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करे और रोजगार की गारंटी को प्रभावी ढंग से लागू करे।
पंचायत के अंत में उपस्थित मजदूरों और यूनियन पदाधिकारियों ने मनरेगा की रक्षा के लिए आंदोलन को तेज करने का संकल्प लिया। सभा में रेनू, सपना, ज्योति, अनिल, पूजा, मुश्तफा, कविता, उषा, किरण, सावित्री, राधा, चमेला, सरोजा, शीला, चंद्रावती, मीना, राधिका, नगीना, हिरावती, शांति, कान्ति, सीता, सीतला, पार्वती और दुलारी समेत सैकड़ों मजदूर मौजूद रहे।

