वाराणसी : कार्यशाला में डाक्टरों को बताया मौत के कारणों को दर्ज करने का तरीका
वाराणसी। सीएमओ कार्यालय सभागार में बुधवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें जन्म मृत्यु पंजीयन कार्यक्रम के अंतर्गत चिकित्सीय प्रमाणीकरण (एमसीसीडी) मृत्यु के कारणों को दर्ज करने का तरीका चिकित्सकों को बताया गया। पांच दिवसीय कार्यशाला शनिवार तक चलेगी।
सीएमओ डा. संदीप चौधरी ने कहा कि जीवन का आखिरी सच मृत्यु होने पर जारी होने वाले प्रारुप में मृत्यु का स्पष्ट कारण चिकित्सकों को अनिवार्य रूप से अंकित करना है। राज्य में लागू 'मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ काज ऑफ डेथ' (मृत्यु के कारणों का चिकित्सा प्रमाणीकरण) का सही तरीके से अंकन किये जाने का निर्देश दिया गया है। इसका समस्त चिकित्साधिकारियों को अनुपालन करना चाहिए। मृत्यु के कारणों का विवरण मृत्यु की ओर ले जाने वाली घटनाओं के क्रम के साथ ही प्रत्येक स्थिति की शुरुआत और मृत्यु के बीच के समय अंतराल को दर्शाता है। जब कोई मृत्यु होती है, तो चिकित्सकीय प्रमाणनकर्ता को मृत्यु का कारण निर्धारित करना होगा और और प्रारूप पर इसकी सटीक रिपोर्ट देनी होगी। मृत्यु को कौन प्रमाणित कर सकता है, इसके लिए दिशा-निर्देश क्षेत्राधिकार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन प्रमाणनकर्ता आमतौर पर एक चिकित्सक या चिकित्सा परीक्षक होता है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ आकाश आनंद, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ बुरहानुद्दीन और फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ कमलेश कुमार ने चिकित्साधिकारियों को प्रशिक्षण दिया। पिछले दो दिनों में करीब 60 चिकित्साधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। नगरीय व ब्लॉक स्तरीय सीएचसी पीएचसी, जिला स्तरीय चिकित्सालय डीडीयू पांडेयपुर, एलबीएस रामनगर व जिला महिला अस्पताल के चिकित्साधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया जा रहा है। इस मौके पर एसीएमओ व नोडल अधिकारी डॉ राजेश प्रसाद, चिकित्साधिकारी डॉ यतीश भुवन पाठक और जन्म मृत्यु पंजीयन कार्यक्रम के जिला डाटा प्रोसेस असिस्टेंट प्रणव तिवारी ने भी चिकित्साधिकारियों को कई टिप्स दिए।
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