वाराणसी : बनकटी हनुमान मंदिर में सीवर का पानी घुसने से श्रद्धालु परेशान, सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

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वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित प्राचीन बनकटी हनुमान मंदिर में सीवर का गंदा पानी भर जाने से श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ गई है। मंदिर परिसर और उससे जुड़ी गली में जलभराव, कीचड़ और सीवर के दूषित पानी के कारण दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार नगर निगम और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

स्थानीय निवासियों के अनुसार बनकटी हनुमान मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, लेकिन मंदिर के प्रवेश मार्ग पर फैले गंदे पानी और दुर्गंध के कारण उन्हें मजबूरी में उसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है। हाल की बारिश के बाद हालात और अधिक खराब हो गए हैं। लोगों का कहना है कि जलभराव के कारण संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ गई है, जिससे श्रद्धालुओं के साथ आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

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मंदिर के महंत और स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि धार्मिक स्थल होने के बावजूद इस क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है। उनका कहना है कि कई बार अधिकारियों और पार्षद को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन सीवर की सफाई और जलनिकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था अब तक नहीं की गई।

इधर, मंदिर मार्ग पर चल रहे सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि सड़क का निर्माण पूरा होने से पहले ही पहली बारिश में कई स्थानों पर उसकी परत उखड़ने लगी और सड़क क्षतिग्रस्त हो गई। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई है। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कर दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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स्थानीय लोगों और मंदिर प्रशासन ने नगर निगम से तत्काल सीवर की सफाई, प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था और सड़क निर्माण कार्य को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की परेशानियां और बढ़ेंगी तथा क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी उत्पन्न हो सकते हैं।

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