वाराणसी : चाइनीज मांझे को लेकर अधिवक्ताओं में रोष, विक्रेताओं पर प्रभावी कार्रवाई और विक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग, 24 घंटे का दिया अल्टीमेटम
वाराणसी। चाइनीज मांझे की अवैध बिक्री और इससे हो रहे जानलेवा हादसों को लेकर अधिवक्ता समाज में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रतिबंध के बावजूद बाजार में इसकी उपलब्धता पर सवाल उठाते हुए अधिवक्ताओं ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि निर्धारित समय में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो अधिवक्ता समाज सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा।
अधिवक्ता अनिल प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि शहर के विभिन्न इलाकों में चाइनीज मांझे की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित होने के बावजूद इसकी खरीद-बिक्री पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाना गंभीर चिंता का विषय है। इस जानलेवा मंझे से राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और अन्य लोगों की जान पर खतरा बना हुआ है। ऐसे में संबंधित विभागों को अभियान चलाकर इसकी बिक्री और आपूर्ति पर पूरी तरह रोक लगानी चाहिए।

लहरतारा पुल पर खुद भी हुए हादसे का शिकार
अधिवक्ता ने चाइनीज मांझे से जुड़े अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जिउतिया पर्व से एक दिन पहले कचहरी से घर लौटते समय वह लहरतारा स्थित नए बाईपास पुल पर इसकी चपेट में आ गए थे। इस घटना में उनकी गर्दन पर कट लग गया था। उन्होंने गर्दन पर चोट के निशान दिखाते हुए बताया कि हादसे में उन्हें गंभीर चोट लग सकती थी।
उनके मुताबिक, हाथ में पहनी अंगूठियों के कारण वह किसी तरह गंभीर चोट से बच सके। उन्होंने कहा कि सड़क पर चलते समय अचानक सामने आ जाने वाला चाइनीज मंझा दोपहिया वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसकी धार से गर्दन और चेहरे पर गंभीर चोट लगने का खतरा बना रहता है।

हालिया मौत की घटना पर जताया दुख
अनिल प्रताप सिंह ने चाइनीज मंझे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की हालिया मौत की घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि प्रतिबंधित मंझे की बिक्री रोकना कितना जरूरी है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में भी निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।
24 घंटे में कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता ने जिला प्रशासन से मांग की कि चाइनीज मंझे की बिक्री करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही इसकी आपूर्ति के स्रोतों का पता लगाकर पूरे नेटवर्क पर अंकुश लगाया जाए। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि नियमित जांच और प्रभावी निगरानी जरूरी है। अधिवक्ता समाज ने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। अब प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

