हल्दी बनी रंग और दुर्वा की कूची, नन्हे बच्चों ने बनाई भगवान गणेश की तस्वीर

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वाराणसी। न रंगों का डिब्बा और न पेंटिंग ब्रश। शुद्ध हल्दी को सिल-बट्टे पर पीसकर रंग तैयार किया गया और दुर्वा से कूची बनाई गई। इसी प्राकृतिक रंग और कूची से नन्हे बच्चों ने भगवान गणेश की तस्वीरों में रंग भरे। राजातालाब तहसील के नरसड़ा-जक्खिनी में प्रबोधिनी फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस अनोखी चित्रकारी एवं पेंटिंग प्रतियोगिता में 55 बच्चों ने हिस्सा लिया।

वेदांता पब्लिक स्कूल में गणेश चतुर्थी के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता में नर्सरी कक्षा के बच्चों को भगवान गणेश की तस्वीरों में प्राकृतिक तरीके से रंग भरने का मौका मिला। प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों के साथ प्रकृति संरक्षण और प्राकृतिक वस्तुओं के उपयोग के प्रति जागरूक करना था।

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सिल-बट्टे पर हल्दी पीसकर बनाया हर्बल रंग

कार्यक्रम की संयोजक श्रेया राय ने बताया कि प्रतियोगिता के लिए बाजार में मिलने वाले कृत्रिम रंगों की जगह विद्यालय में ही हर्बल रंग तैयार किया गया। शुद्ध हल्दी को सिल-बट्टे पर पीसा गया और दुर्वा से कूची तैयार की गई। बच्चों ने इसी कूची और हल्दी के रंग से चित्रों में रंग भरे।

प्रतियोगिता में शिवम बिंद ने पहला स्थान हासिल किया। कृष्णा राय दूसरे, अंशिका यादव तीसरे और शिवांगी मिश्रा चौथे स्थान पर रहीं, जबकि शुभम ने पांचवां स्थान प्राप्त किया। विजेता बच्चों को श्रेया राय और धृति राय ने आयुर्वेदिक पौधे, आंवले का मुरब्बा, कॉपी और पेंसिल देकर सम्मानित किया। प्रतियोगिता में शामिल अन्य 50 बच्चों को भी सांत्वना पुरस्कार के रूप में कॉपी और पौधे दिए गए।

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श्रेया राय ने कहा कि भारतीय परंपराओं का प्रकृति से गहरा संबंध रहा है। वर्तमान समय में कृत्रिम और रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों को छोटी उम्र से प्राकृतिक वस्तुओं के इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से यह पहल की गई।

कार्यक्रम का संचालन प्रबोधिनी फाउंडेशन के महासचिव विनय शंकर राय ने किया और धन्यवाद ज्ञापन श्रेया राय ने किया। इस दौरान कृपा शंकर, सुजीत सिंह, शशिकांत मिश्रा, संतोष यादव, अखिलेश मिश्रा, ललिता विश्वकर्मा, रेखा देवी, दीक्षा सिंह, अनीता मिश्रा, सगुन मिश्रा, नेहा मिश्रा और चंद्रशेखर राजभर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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