काशी की परिषदीय स्कूल की शिक्षिका तूबा आसिम को आईआईटी मद्रास के प्रांगण में "विद्या स्त्री" सम्मान से नवाजा गया 

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बेसिक शिक्षा के बच्चों को पढ़ाने के लिए नई तकनीक और नवाचार के लिए दिया गया सम्मान 

योगी सरकार शिक्षा के डिजिटलीकरण, स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना, शिक्षक सशक्तिकरण और मूलभूत विकास पर दे रही जोर 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप डिजिटल, समावेशी एवं कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा 


शिक्षिका तूबा आसिम ने बच्चों को  सिमुलेशन द्वारा एक्सपेरिमेंट की अवधारणा विकसित कर विषय को आसान बनाया 

सिमुलेशन  तकनीक से बच्चे खुद एक्सपेरिमेंट करके 'क्यों' और 'कैसे' का जवाब दे सकते हैं

आईआईटी मद्रास तथा ओपेनमेंटर ट्रस्ट चेन्नई "प्रोजेक्ट विद्या शक्ति ,क्लास 6 से 8 तक के बच्चों को ऑनलाइन गणित,विज्ञानं और अंग्रेजी पढ़ाता है* 


वाराणसी के 353 विद्यालयों में 50 हज़ार से अधिक बच्चे इस योजन का निशुल्क लाभ उठा रहे  


 काशी की परिषदीय स्कूल की शिक्षिका को आईआईटी मद्रास के प्रांगण में "विद्या स्त्री" सम्मान से नवाजा गया है। ये सम्मान बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल के बच्चों को पढ़ाने की नई तकनीक और नवाचार के लिए दिया गया है।राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) के प्रावधानों के अनुरूप डिजिटल, समावेशी एवं कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार शिक्षा के डिजिटलीकरण, स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना, शिक्षक सशक्तिकरण और मूलभूत विकास पर जोर दे रही है। इस दिशा में बेसिक स्कूल की शिक्षिका तूबा आसिम ने बच्चों को आसान तरीके से पढ़ाने का तरीका निकालते हुए सिमुलेशन द्वारा एक्सपेरिमेंट की अवधारणा को विकसित किया है। इस  सिमुलेशन  तकनीक से बच्चे खुद एक्सपेरिमेंट करके 'क्यों' और 'कैसे' का जवाब दे सकते हैं। बच्चों के साथ शिक्षकों को भी डाइट पर इसकी ट्रेनिंग दे चुकी है। 


बेसिक शिक्षा अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि वाराणसी की पीएम श्री कम्पोज़िट स्कूल गंगापुर की शिक्षक तूबा आसिम को आईसीटी एवं सिमुलेशन के क्षेत्र में वर्ष 2026 में, विद्या शक्ति एवं आईआईटी मद्रास प्रवर्तक टेक्नोलॉजी फाउंडेशन द्वारा 'विद्या स्त्री' का अवार्ड आईआईटी मद्रास में दिया गया है, जो  बेसिक शिक्षा विभाग के लिए गौरव की बात है । उन्होंने जानकारी दिया कि पीएम श्री विद्यालयों, उच्च प्राथमिक विद्यालयों, एवं कम्पोजिट विद्यालयों के विद्यार्थियों को आई.एफ.पी.डी, एआई जैमिनी, चैटजीपीटी, नोटबुक एलएम ,दीक्षा ऐप, सिमुलेशन पोर्टल- ओ-लैब (OLab), पीएचईटी,सिमपॉप जैसे आधुनिक माध्यमों एवं आईसीटी उपकरणों के प्रभावी संचालन एवं शैक्षणिक उपयोग करके पढ़ाया जा रहा है। 


मद्रास की 'विद्या शक्ति' एक प्रमुख मुफ्त डिजिटल शिक्षा पहल हैइस प्रोजेक्ट के ग्लोबल कन्वेनर व ऑपरेशन डॉ. शिवा सुब्रमण्यम एस ने बताया कि सरकार और आईआईटी मद्रास तथा ओपेनमेंटर ट्रस्ट चेन्नई के बीच एमओयू है, 2023 से शुरू हुई "प्रोजेक्ट विद्या शक्ति तहत क्लास 6 से 8 तक के बच्चों को ऑनलाइन गणित ,विज्ञानं और अंग्रेजी पढ़ाया जा रहा है। विद्याशक्ति का मकसद बेसिक शिक्षा के नीव को मजबूत करना है,जिससे कॉलेज जाने से पहले बच्चे ड्राप आउट न करे और महाविद्यालयों में छात्रों का सकल नामांकन अनुपात बढे। वाराणसी के 353 विद्यालयों में 50 हज़ार से अधिक बच्चे इस योजन का निशुल्क लाभ उठा रहे है।  


विद्या स्त्री सम्मान से सम्मानित तूबा आसिम  बताती है कि योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद में डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। जिसमे बच्चों को पढ़ने-लिखने और गणित की बुनियादी दक्षता डिजिटल मॉड्यूल और ऐप्स के माध्यम से सिखाई जा रही है। टैबलेट और ई-लर्निंग सामग्री छात्रों को टैबलेट और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी डिजिटल शिक्षा का लाभ मिल रहा है। 


वर्जन 

 वाराणसी ,बेसिक शिक्षा विभाग की शिक्षिका तूबा आसिम ने व्यावहारिक शिक्षण पद्धति को अपनाते हुए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उपकरणों को एकीकृत करते हुए नवाचार किया है , जिससे ओ-लैब्स और पीएचईटी के माध्यम से आभासी प्रयोग संभव हो सका। उन्होंने स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना में सहायता की और साथी शिक्षकों को डिजिटल शिक्षण में प्रशिक्षित किया। उनके प्रयासों से छात्रों में वैज्ञानिक समझ मजबूत हुई है। विद्या शक्ति संस्थान उनको 'विद्या स्त्री' पुरस्कार प्रदान करते हुए गर्व महसूस करता है।

एमजे शंकर रमन 
सीईओ,आईआईटीएम  प्रवर्तक

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