शारदीय नवरात्र में निभाई जा रही परंपरा, अष्टमी पर काशी विश्वनाथ धाम में शक्ति आराधना, मां विशालाक्षी को अर्पित की गई शृंगार सामग्री
वाराणसी। शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर रविवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शक्ति आराधना की गई। इस दौरान मां भगवती की उपासना के साथ बाबा श्री काशी विश्वनाथ के प्रति श्रद्धा निवेदित की गई। धार्मिक परंपरा के अनुसार मां विशालाक्षी के लिए शृंगार सामग्री बाबा श्री विश्वेश्वर के समक्ष श्रद्धापूर्वक अवलोकित कराने के बाद प्रेषित की गई। साथ ही नवदुर्गा सप्तशती के पाठ के माध्यम से मां आदिशक्ति की महिमा का गुणगान किया गया।
नवरात्र के पावन अवसर पर धाम में भक्ति और आध्यात्मिक साधना का क्रम जारी है। अष्टमी के दिन संपन्न अनुष्ठानों में मां शक्ति की आराधना और भगवान शिव के प्रति समर्पण की काशी की प्राचीन परंपरा दिखाई दी। इस दौरान जगत के कल्याण, परिवारों में सुख-शांति और समाज में सद्भाव एवं समृद्धि बनाए रखने की कामना की गई।
शिव और शक्ति की आराधना का संगम
काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में भगवान शिव और मां शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। श्री काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्र के दौरान होने वाले धार्मिक अनुष्ठान इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। मां विशालाक्षी को शृंगार सामग्री अर्पित करने की प्रक्रिया के माध्यम से देवी आराधना के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई।
शारदीय नवरात्र का प्रत्येक दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की उपासना और आध्यात्मिक चेतना के जागरण का अवसर माना जाता है। इसी क्रम में अष्टमी पर धाम में धार्मिक परंपराओं का विधिपूर्वक निर्वहन किया गया। श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न अनुष्ठानों ने नवरात्र के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। धाम में मां भगवती की आराधना और बाबा विश्वनाथ के प्रति श्रद्धा के साथ लोककल्याण की कामना की गई।

