रथयात्रा महोत्सव के समापन पर श्री जगन्नाथ मंदिर में विशाल महाप्रसाद भंडारा, हजारों श्रद्धालुओं ने पाया प्रसाद
वाराणसी। अस्सी स्थित प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा महोत्सव के समापन के उपरांत आषाढ़ मास की द्वादशी तिथि पर परंपरागत विशाल महाप्रसाद भंडारे का आयोजन किया गया। ट्रस्ट श्री भगवान जगन्नाथ जी की ओर से आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में काशी सहित आसपास के जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर महाप्रसाद ग्रहण किया और पूरे मंदिर परिसर में दिनभर भक्ति एवं श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार रथयात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के मंदिर लौटने पर भक्तों को महाप्रसाद वितरित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए ट्रस्ट ने इस वर्ष भी भव्य भंडारे का आयोजन किया। भंडारे का शुभारंभ भगवान जगन्नाथ के विशेष पूजन एवं भोग अर्पण के साथ हुआ। मंदिर के पुजारी पंडित राधेश्याम पांडेय ने विधि-विधान से भगवान को पूरी, कोहड़े की सब्जी और गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाया। आरती के बाद महाप्रसाद वितरण शुरू हुआ, जो दोपहर से लेकर देर शाम तक लगातार चलता रहा। श्रद्धालु अनुशासित ढंग से कतारों में खड़े होकर महाप्रसाद ग्रहण करते रहे।

पूरे आयोजन के दौरान ट्रस्ट के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने प्रसाद वितरण, बैठने की व्यवस्था तथा अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया। भारी भीड़ के बावजूद आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा। इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य अन्नपूर्णा सिंह, भाजपा नेता अशोक पांडेय, ट्रस्ट के न्यासी उत्कर्ष श्रीवास्तव, ज्ञानेश्वर, विक्रांत सिंह, व्यास, आशु तिवारी, दिलीप मिश्रा सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रामयश मिश्रा ने प्रस्तुत किया।

ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ के महाप्रसाद भंडारे की यह परंपरा मंदिर की स्थापना काल से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों तक इसका स्वरूप सीमित रहा, लेकिन अब ट्रस्ट ने इसे पुनः भव्य रूप में आयोजित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी प्रत्येक वर्ष रथयात्रा महोत्सव के समापन पर इसी प्रकार विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के महाप्रसाद का लाभ प्राप्त कर सकें। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर "जय जगन्नाथ" के उद्घोष से गुंजायमान रहा।

