हांगकांग के अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजेगा भारतीय संस्कृति का स्वर, बीएचयू की प्रो. श्रद्धा सिंह करेंगी शोध-पत्र प्रस्तुत

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वाराणसी। काशी की शैक्षणिक परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक चिंतन को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के हिन्दी विभाग की वरिष्ठ आचार्य प्रो. (डॉ.) श्रद्धा सिंह का चयन हांगकांग में आयोजित होने वाली एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शोध-पत्र प्रस्तुति के लिए हुआ है। आगामी 6 जून को आयोजित इस संगोष्ठी में वह भारतीय संस्कृति के वैश्विक महत्व और उसके मानवीय मूल्यों पर केंद्रित अपना शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगी।

यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी साहित्य संचय शोध संवाद फाउंडेशन, दिल्ली तथा साइंस टुगेदर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम में भारत सहित विभिन्न देशों के शिक्षाविद, शोधकर्ता, साहित्यकार, चिंतक और सांस्कृतिक अध्येता भाग लेंगे। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय संस्कृति, साहित्य और ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श करना है।

प्रो. श्रद्धा सिंह “विश्व कल्याण और भारतीय संस्कृति” विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगी। अपने शोध में वह भारतीय संस्कृति के उन मूलभूत सिद्धांतों को रेखांकित करेंगी, जो मानवता, सह-अस्तित्व, शांति, करुणा, समरसता और विश्वबंधुत्व जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देते हैं। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा की उन अवधारणाओं पर भी प्रकाश डालेंगी, जो आज की वैश्विक चुनौतियों-जैसे सामाजिक असंतुलन, सांस्कृतिक संघर्ष और मानवीय मूल्यों के क्षरण के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

शिक्षा और साहित्य जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि प्रो. सिंह का शोध-पत्र भारतीय सांस्कृतिक दर्शन की व्यापकता और उसकी समकालीन उपयोगिता को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगा। इससे न केवल भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रतिष्ठा को बल मिलेगा, बल्कि हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार को भी नई दिशा प्राप्त होगी।

बीएचयू के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रो. श्रद्धा सिंह को शुभकामनाएं दी हैं। विश्वविद्यालय समुदाय ने इसे बीएचयू की अकादमिक उत्कृष्टता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान का प्रतीक बताया है। उनका मानना है कि इस तरह की सहभागिता से भारतीय विश्वविद्यालयों और वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों के बीच संवाद और सहयोग को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

हांगकांग में आयोजित यह संगोष्ठी विभिन्न देशों के विद्वानों के बीच विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बनेगी। ऐसे में प्रो. श्रद्धा सिंह की सहभागिता न केवल बीएचयू बल्कि काशी और भारतीय संस्कृति के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है। उनकी प्रस्तुति से विश्व समुदाय के समक्ष भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और ज्ञान परंपरा की सार्थकता को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिलेगा।

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