प्राचीन लाट भैरव रामलीला का 483वां संस्करण शुरू, मुकुट पूजन के साथ लीला का शुभारंभ

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वाराणसी। काशी की प्राचीन श्री आदि रामलीला लाट भैरव, वरुणा-संगम का 483वां संस्करण रविवार को विधिवत मुकुट पूजन के साथ शुरू हुआ। विशेश्वरगंज स्थित लीलास्थल पर पहले दिन मंगलाचरण के सस्वर गान के साथ रामलीला की शुरुआत हुई। झाल-मंजीरे की झंकार और मानस के दोहे-चौपाइयों की गूंज से लीलास्थल भक्तिमय हो उठा। अगले 22 दिनों तक काशी के विभिन्न निर्धारित स्थलों पर प्रसंगानुसार रामलीला का मंचन किया जाएगा।

लीला के प्रथम दिन व्यास दयाशंकर त्रिपाठी के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुकुट पूजन की परंपरा पूरी की गई। रामलीला समिति के प्रधानमंत्री कन्हैयालाल यादव मुख्य यजमान रहे। पूजन के दौरान चयनित मूर्ति पात्रों का तिलक कर माल्यार्पण किया गया। रामायण मंडली ने मानस की पावन प्रति का पूजन और नमन करने के बाद बालकांड के पांच दोहों का सस्वर पाठ किया।

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संघर्ष और लोककल्याण की गाथा है लाट भैरव की लीला
लाट भैरव रामलीला की अपनी विशिष्ट परंपरा है। तुलसीदास के समकालीन संत मेधा द्वारा स्थापित मानी जाने वाली इस प्राचीन रामलीला में राजसी वैभव अथवा बाललीला के प्रसंगों का मंचन नहीं किया जाता। यहां भगवान श्रीराम के जीवन में आए संघर्षों और उनके आदर्शों से जुड़ी गाथाओं को प्रमुखता दी जाती है। लीला के माध्यम से सर्वसमाज के कल्याण और मर्यादा का संदेश देने का प्रयास किया जाता है।

रामलीला के दौरान अगले 22 दिनों तक विभिन्न प्रसंगों का मंचन निर्धारित स्थलों पर होगा। सोमवार को लीलास्थल अयोध्या में स्वरूप शृंगार और राजगद्दी की तैयारी से जुड़ी लीला का मंचन किया जाएगा। मुकुट पूजन कार्यक्रम में सहायक व्यास पंकज त्रिपाठी, केवल कुशवाहा, मुरलीधर पांडेय, रामप्रसाद मौर्य, गोविंद विश्वकर्मा, संतोष साहू, धर्मेंद्र शाह, शिवम अग्रहरि, चंद्रिका प्रसाद मौर्य, श्यामसुंदर, कामेश्वर पाठक, जयप्रकाश राय, महेंद्र सिंह, उत्कर्ष कुशवाहा, रुद्र अग्रहरि, अनुराग सोनकर, कृष्णा यादव, बचाऊ लाल, संतुष्ट सोनकर सहित बड़ी संख्या में लीला प्रेमी मौजूद रहे।

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