शिक्षकों ने बीएचयू जंतु विज्ञान विभाग का किया शैक्षणिक भ्रमण, शोध और नवाचारों से हुए रूबरू 

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वाराणसी। यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर, बीएचयू में 23 मार्च से संचालित फोकस्ड ट्रेनिंग एंड इंडक्शन प्रोग्राम के अंतर्गत प्रतिभागी शिक्षकों ने जंतु विज्ञान विभाग का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विभाग में चल रहे अत्याधुनिक शोध कार्यों, प्रयोगशालाओं और संसाधनों का अवलोकन किया। उन्होंने शोध कार्यों की सराहना की। 

कार्यक्रम की शुरुआत जीन विज्ञानी प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के संबोधन से हुई। उन्होंने अजनाला मामले में किए गए शोध कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि बीएचयू की टीम दक्षिण भारत जाकर संबंधित परिवारों से सैंपल एकत्र करेगी, जिनका वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि जॉर्जिया की क्वीन केटेवन की 400 वर्ष पुरानी हत्या के रहस्य को सुलझाने में भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी की जा चुकी है।

डॉ. प्रज्ञा वर्मा ने प्रतिभागियों को ‘इंटरनल क्लॉक’ यानी जैविक घड़ी के साथ जीवनशैली को संतुलित करने के महत्व को समझाया। वहीं डॉ. रुद्र कुमार पांडेय ने कोविड-19 महामारी के दौरान ज्ञान लैब द्वारा किए गए व्यापक शोध और सेवाओं की जानकारी दी। चंचल देवनानी ने सिंधी समुदाय पर किए गए अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि भारत के सिंधी, पाकिस्तानी सिंधियों की अपेक्षा भारतीयों के अधिक निकट हैं।

कार्यक्रम में डॉ. चंदना बसु (सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डर्स) ने अपने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित शोध को साझा किया। उन्होंने बताया कि फिंगरप्रिंट का निर्माण केवल त्वचा की संरचना नहीं, बल्कि अंगों के विकास से जुड़े जीनों द्वारा नियंत्रित होता है। उनके 2022 में प्रतिष्ठित Cell जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, जीनोम वाइड एसोसिएशन स्टडी में 43 ऐसे म्युटेशन की पहचान की गई, जो फिंगरप्रिंट के प्रकार (आर्च, लूप, व्हर्ल) को प्रभावित करते हैं। विशेष रूप से EVI1 जीन के पास स्थित वेरिएंट का महत्वपूर्ण प्रभाव पाया गया।

इसके अलावा, प्रतिभागियों को विभागीय संग्रहालय का भ्रमण अर्पिता, अंकिता और दीक्षा ने कराया, जबकि अभिषेक ने ज्ञान लैब में डीएनए आइसोलेशन की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के समापन पर केंद्र के निदेशक प्रोफेसर आनंद वर्धन शर्मा ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 19 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के साथ शिक्षकों के ज्ञान और कौशल को उन्नत करना है।

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