वाराणसी में टीबी मुक्त भारत अभियान ने पकड़ी रफ्तार, सघन जांच से 16 मरीजों की पहचान

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वाराणसी। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनपद वाराणसी में विशेष 100 दिवसीय कार्यक्रम तेजी से संचालित किया जा रहा है। अब तक हुए एक्स-रे कैंपों और सघन जांच के जरिए 16 टीबी मरीजों की पहचान कर उनका उपचार शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग माइक्रो प्लान के तहत अभियान को शहरी क्षेत्रों के बाद अब ग्रामीण इलाकों में भी विस्तार देने की तैयारी में है।

100 दिवसीय अभियान का तेज़ी से क्रियान्वयन
विश्व टीबी दिवस (24 मार्च 2026) पर जे.पी. नड्डा द्वारा शुरू किए गए इस अभियान को वाराणसी में प्राथमिकता के साथ लागू किया जा रहा है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ पीयूष राय ने बताया कि जनपद में चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति बनाकर काम किया जा रहा है।

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कैंप के जरिए सघन जांच, सैकड़ों लोगों की स्क्रीनिंग
डॉ. राय के अनुसार, अब तक 14 विशेष एक्स-रे कैंप आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 1295 लोगों की जांच की गई। इनमें से 281 व्यक्तियों की रिपोर्ट संदिग्ध पाई गई, जबकि 120 लोगों के बलगम सैंपल जांच के लिए भेजे गए। जांच के बाद 16 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई, जिनका इलाज शुरू कर दिया गया है। इन कैंपों में एक्स-रे के साथ-साथ ब्लड प्रेशर, शुगर और हीमोग्लोबिन की जांच भी की जा रही है।

अब ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेगा अभियान का दायरा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अगले सप्ताह से इस अभियान का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों में किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों की जांच कर समय रहते टीबी की पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

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स्कूलों में जागरूकता से 12,900 लोग लाभान्वित
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश प्रसाद ने बताया कि जन-जागरूकता के लिए राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम और पीरामल फाउंडेशन के सहयोग से 125 विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इससे अब तक करीब 12,900 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को जागरूक किया जा चुका है।

387 ग्राम पंचायतें बनीं टीबी मुक्त
जिला क्षय रोग अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में जनपद की 387 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया था। वहीं 2026 में अब तक करीब 1,65,000 लोगों की स्क्रीनिंग कर संदिग्ध मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजा गया है।

‘टीबी मुक्त भारत’ ऐप से मिल रही मदद
स्वास्थ्य विभाग द्वारा “टीबी मुक्त भारत” मोबाइल ऐप के जरिए मरीजों को बेहतर सुविधा दी जा रही है। इस ऐप में मौजूद ‘खुशी’ चैटबॉट के माध्यम से मरीजों को जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन मिल रहा है। साथ ही दवा लेने की याद दिलाने और छोटी समस्याओं के समाधान में भी यह ऐप सहायक साबित हो रहा है।

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