मेरे सपनों का भारत’ में विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की विकसित राष्ट्र की परिकल्पना, सेवा संकल्प अभियान के तहत भाषण प्रतियोगिता, 41 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केन्द्र में गुरुवार को सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के 41 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने विकसित, आत्मनिर्भर, संस्कारित और विश्वगुरु भारत की अपनी परिकल्पना विचारों और तर्कों के माध्यम से प्रस्तुत की।
प्रतियोगिता में हर्ष पाण्डेय ने प्रथम, विवेक सुमन शर्मा ने द्वितीय और अभिषेक उपाध्याय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। रत्नेश अग्रहरी को सांत्वना पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। प्रतिभागियों ने भारतीय संस्कृति, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति, राष्ट्र निर्माण और सेवा-भाव जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि उनके सपनों का भारत ज्ञान, संस्कार, सेवा, अनुशासन, नैतिकता और राष्ट्रनिष्ठा पर आधारित होना चाहिए। युवा शक्ति के विचार, संकल्प और कर्मठता देश के भविष्य को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरणा लेकर आधुनिक चुनौतियों के समाधान खोजने पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. राजनाथ ने कहा कि सपनों का भारत केवल कल्पना से नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, सेवा और राष्ट्रनिष्ठा के निरंतर प्रयासों से निर्मित होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों का जिम्मेदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया।
अध्यक्षता करते हुए छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष एवं सेवा संकल्प अभियान के नोडल अधिकारी प्रो. शैलेश कुमार मिश्रा ने कहा कि अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, सहयोग, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। प्रतियोगिता विद्यार्थियों को अपने व्यक्तिगत सपनों को व्यापक सामाजिक हित से जोड़ने का अवसर देती है।
निर्णायक मंडल में प्रो. महेन्द्र पाण्डेय, प्रो. विशाखा शुक्ला और डॉ. नितिन आर्य शामिल रहे। संयोजक डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव ने बताया कि विद्यार्थियों के वक्तव्यों में भारत के प्रति आशा, विश्वास और उत्तरदायित्व की भावना दिखाई दी। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. अनन्तेश्वर मिश्रा के वैदिक मंगलाचरण से हुआ। संचालन डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अर्पिता मिश्रा ने किया।

