अस्सी घाट पर छुट्टा पशुओं का जमावड़ा, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को खतरा
वाराणसी। विश्व प्रसिद्ध अस्सी घाट एक नई समस्या से जूझ रहा है। रविवार को घाट पर दर्जनों की संख्या में छुट्टा सांड और गायें घूमती नजर आईं, जिससे श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों में उनके हमले का डर सताता रहा। घाट की सीढ़ियों, मुख्य मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में पशुओं की निर्बाध आवाजाही ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कई बार सांड घाट पर आपस में भिड़ते हुए भी दिखाई दिए। अचानक होने वाली इन घटनाओं से घाट पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच जाती है। यदि समय रहते इन पशुओं को नियंत्रित नहीं किया गया तो कोई गंभीर हादसा कभी भी हो सकता है।

श्रद्धालुओं ने बताया कि गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के दौरान अचानक सामने आ जाने वाले सांडों से डर का माहौल बना रहता है। विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। वहीं, घाट पर पहुंचे विदेशी पर्यटक भी इस दृश्य को देखकर हैरान और असहज नजर आए। कई पर्यटकों ने इसे सुरक्षा में बड़ी चूक बताया।
स्थानीय दुकानदारों और नाविकों का कहना है कि नगर निगम द्वारा शहर में छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए विशेष टीम गठित की गई है, लेकिन अस्सी घाट जैसे भीड़भाड़ वाले और प्रमुख पर्यटन स्थल पर टीम की सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। उनका आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि अस्सी घाट काशी का प्रमुख पर्यटन केंद्र है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और सैलानी पहुंचते हैं। ऐसे में छुट्टा पशुओं की मौजूदगी न केवल लोगों की जान के लिए खतरा बन रही है, बल्कि काशी की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
लोगों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल विशेष अभियान चलाकर अस्सी घाट और आसपास के इलाकों से छुट्टा पशुओं को हटाया जाए। साथ ही उन्हें सुरक्षित गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके और घाट की गरिमा व सुरक्षा दोबारा बहाल हो सके।

