सहस्त्र चंडी महायज्ञ में मां मातंगी का विशेष पूजन, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा यज्ञ परिसर
वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन एवं सानिध्य में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ के नौवें दिन मां मातंगी का विशेष पूजन-अनुष्ठान वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। यज्ञ वेदी पर विशेष आहुतियां अर्पित कर विश्व एवं जनकल्याण, सुख-शांति, समृद्धि और सर्वत्र मंगल की कामना की गई।
महायज्ञ के नौवें दिन प्रातःकाल से ही यज्ञशाला में वैदिक आचार्यों एवं विद्वान ब्राह्मणों द्वारा पूजन-अनुष्ठान प्रारंभ किया गया। संकल्प, गणेश पूजन, कलश पूजन, वेदी पूजन सहित निर्धारित धार्मिक प्रक्रियाओं के बाद दस महाविद्याओं में नौवीं महाविद्या मां मातंगी का विशेष पूजन-अर्चन किया गया। देवी को विधि-विधान से पूजन सामग्री अर्पित कर आराधना की गई और यज्ञाग्नि में विशेष आहुतियां समर्पित की गईं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां मातंगी को संगीत, कला, वाणी, विद्या और आंतरिक ज्ञान की देवी माना जाता है। साधना परंपरा में उनका स्वरूप ज्ञान, रचनात्मकता और वाणी की शक्ति से जुड़ा हुआ है। मां मातंगी की उपासना को आध्यात्मिक ज्ञान, विवेक, वाणी की शुद्धता और साधना की प्रेरणा से संबंधित माना जाता है।
जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन वैदिक परंपरा में महाविद्याओं की साधना का विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व है। मां मातंगी ज्ञान, वाणी, कला एवं अंतःचेतना की शक्ति का प्रतीक स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ और देवी उपासना का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित नहीं, बल्कि समस्त प्राणी जगत के कल्याण की भावना को मजबूत करना है।
महायज्ञ स्थल पर पूरे दिन श्रद्धालुओं की मौजूदगी बनी रही। वैदिक मंत्रों की गूंज और यज्ञाग्नि में आहुतियों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने मां मातंगी की आराधना कर परिवार एवं समाज के सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन में संत-महात्माओं, विद्वान आचार्यों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।

