दुर्गाकुंड बनकटी हनुमान मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा, कथा वाचक ने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मर्म समझाया

WhatsApp Channel Join Now

वाराणसी। दुर्गाकुंड बनकटी हनुमान मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस पर कथावाचक ने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के अद्भुत प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को कथा की महिमा से अवगत कराया। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे समय भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया।

कथावाचक ने बताया कि जब देवर्षि नारद पृथ्वी पर आए, तो उन्होंने देखा कि भक्ति एक तरुण स्त्री के रूप में विलाप कर रही है, जबकि उसके दो पुत्र-ज्ञान और वैराग्य-वृद्ध और अचेत अवस्था में पड़े हैं। यह दृश्य देखकर नारद जी अत्यंत व्यथित हो गए और उन्होंने उन्हें जागृत करने के लिए अनेक उपाय किए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

इसी दौरान आकाशवाणी हुई कि उनका उद्धार केवल "सत्कर्म" से संभव है। इसके बाद सनकादिक ऋषियों ने नारद जी को उपदेश दिया कि श्रीमद्भागवत कथा ही वह श्रेष्ठ सत्कर्म है, जिसके श्रवण से ज्ञान और वैराग्य पुनः युवा हो जाएंगे और भक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।

कथावाचक ने आगे आत्मदेव और धुंधुकारी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि आत्मदेव नामक ब्राह्मण का पुत्र धुंधुकारी अत्यंत पापी था, जिसकी अकाल मृत्यु हो गई और वह प्रेत योनि में भटकने लगा। उसके भाई गोकरना ने उसके उद्धार के लिए सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। कथा के प्रभाव से धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त होकर दिव्य देह धारण कर बैकुंठ धाम को प्राप्त हुआ।

कथा के प्रथम दिवस के अंत में मुख्य कथा की पृष्ठभूमि तैयार करते हुए शुक्रदेवा और परीक्षित के मिलन का प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक ने बताया कि अभिमन्यु पुत्र राजा परीक्षित को ऋषि शमीक के पुत्र श्रृंगी द्वारा सात दिनों में तक्षक नाग के डसने से मृत्यु का श्राप मिला था।

श्राप मिलने के बाद राजा परीक्षित ने राज-पाट का त्याग कर गंगा तट पर तपस्या आरंभ कर दी और जीवन के अंतिम समय में यह प्रश्न किया कि "जिस व्यक्ति की मृत्यु निकट हो, उसे क्या करना चाहिए?" इसी प्रश्न के उत्तर में महर्षि शुकदेव जी ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य उपदेश देना प्रारंभ किया। कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आरती और प्रसाद ग्रहण किया। आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में श्रीमद्भागवत कथा के अन्य प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।

Share this story