काशी में वैदिक मंत्रों के बीच श्रीराम पट्टाभिषेक महोत्सव का भव्य शुभारंभ, देश भर के विद्वानों व श्रद्धालु हुए शामिल

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वाराणसी। धर्मनगरी काशी में गुरुवार को अग्नि प्रतिष्ठापन और वैदिक अनुष्ठानों के साथ श्रीराम साम्राज्य पट्टाभिषेक महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। मानसरोवर स्थित श्रीराम तारक आश्रम परिसर में लगातार तीसरे वर्ष आयोजित इस महोत्सव में देशभर से आए विद्वानों और श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी रही।

महोत्सव की शुरुआत श्री गणेश पूजन, पंचगव्य प्राशन और दीक्षा धारण की परंपरागत विधियों से हुई। याज्ञिक सत्र के दौरान वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चारण के बीच पवित्र अग्नि की स्थापना की। इस अवसर पर यज्ञ के मुख्य यजमान वीवी सुंदर शास्त्री को विधिवत दीक्षा प्रदान की गई। मुख्य आचार्य उलीमिरी सोमायाजुलू ने उन्हें सपत्नीक दीक्षा देकर यज्ञीय अनुष्ठानों में सम्मिलित कराया।

गणेश पूजन के उपरांत वाल्मिकि रामायण के बाल कांड में वर्णित प्रसंगों के अनुसार यज्ञ कुंड में आहुतियां अर्पित की गईं। श्रीराम जन्म, विवाह और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का स्मरण करते हुए श्रीराम, माता जानकी और अन्य प्रमुख पात्रों के नाम से विधिवत आहुति समर्पित की गई। उधर आश्रम के श्रीरामालय मंडप में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 40 विद्वानों ने बाल कांड के संपूर्ण श्लोकों का सामूहिक पारायण किया। पूरे वातावरण में वैदिक ध्वनियों और भक्ति की गूंज सुनाई दी। इस दौरान महिलाओं ने श्रीराम जन्मोत्सव और विवाह कल्याणम् से जुड़े पारंपरिक लोकाचारों का भी आयोजन किया, जिससे कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग और गहराई जुड़ गई।

महोत्सव की पूर्व संध्या पर बुधवार को भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई। इसमें मुख्य यजमान वीवी सुंदर शास्त्री की धर्मपत्नी वेमुरी उमा रामायण की पोथी को मस्तक पर धारण कर अग्रिम पंक्ति में चल रही थीं। दक्षिण भारत के विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए। काशी के केदार खंड की गलियों से गुजरती यह यात्रा अंततः आंध्रा आश्रम के मंडप में रामायण ग्रंथ की विधिवत स्थापना के साथ संपन्न हुई।

इस आयोजन में अन्नदानम चिदम्बर शास्त्री, सी वी बी सुब्रह्मण्यम, सिवा शर्मा और पप्पू कृष्ण प्रसाद सहित कई विद्वानों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सफल संचालन आश्रम के प्रबंधक वीवी सीताराम ने किया। भक्ति, परंपरा और वैदिक संस्कृति के संगम से सजा यह महोत्सव काशी की आध्यात्मिक गरिमा को और भी समृद्ध करता नजर आया।

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