मणिकर्णिका घाट पर श्रमदान, स्वच्छता के साथ तीर्थ की गरिमा बनाए रखने का संदेश

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नमामि गंगे और नगर निगम की टीम ने चलाया सफाई अभियान, श्रद्धालुओं से घाट स्वच्छ रखने की अपील

वाराणसी। मणिकर्णिका घाट पर नमामि गंगे और नगर निगम की टीम ने स्वच्छता अभियान चलाकर श्रमदान किया। अभियान के दौरान घाट परिसर की सफाई के साथ श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने कहा कि धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने में स्वच्छ वातावरण की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने लोगों से घाटों पर कूड़ा न फेंकने और पूजा सामग्री निर्धारित स्थान पर डालने की अपील की।

राजेश शुक्ला ने कहा कि मणिकर्णिका घाट काशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। सनातन परंपरा में इसे महाश्मशान के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थल जीवन और मोक्ष की अवधारणा से जुड़ा हुआ है। ऐसे स्थान पर श्रमदान और स्वच्छता अभियान के माध्यम से सेवा की भावना को बढ़ावा दिया जा सकता है।

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श्रमदान को बताया सेवा का माध्यम
उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट पर श्रमदान केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्थल के प्रति जिम्मेदारी और सेवा भाव का भी प्रतीक है। घाटों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और तीर्थयात्री पहुंचते हैं। ऐसे में स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन के साथ आम लोगों की भी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं से जुड़े स्थलों पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी घाटों की साफ-सफाई बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए। इसके लिए प्लास्टिक, पूजा सामग्री और अन्य कचरे को खुले में फेंकने के बजाय निर्धारित स्थान पर डालने की जरूरत है।

गंगा घाटों की स्वच्छता सामूहिक जिम्मेदारी
अभियान के दौरान नमामि गंगे और नगर निगम की टीम ने घाट परिसर की सफाई की। इस दौरान लोगों को गंगा और घाटों को प्रदूषण से बचाने के लिए जागरूक किया गया। गंगा सेवक ने कहा कि काशी की पहचान गंगा, घाटों और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी है। इसलिए इन स्थलों की स्वच्छता और व्यवस्था बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि नियमित सफाई के साथ नागरिकों और श्रद्धालुओं की सहभागिता से घाटों को स्वच्छ रखने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि धार्मिक अनुष्ठान के लिए घाट पर आने के साथ स्वच्छता का भी ध्यान रखें और दूसरे लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। राजेश शुक्ला ने कहा कि मणिकर्णिका जैसे धार्मिक स्थलों पर सेवा और श्रमदान लोगों में सामाजिक जिम्मेदारी तथा सेवा भावना को मजबूत करने का माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने स्वच्छता अभियानों में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी की आवश्यकता जताई।

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