डाफी में देवी भागवत कथा का दूसरा दिन : साध्वी गीताम्बा तीर्थ ने सुनाई वेदव्यास-नारद संवाद की प्रेरक कथा

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वाराणसी। डाफी स्थित कमला आशीर्वाद वाटिका में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को श्रद्धालु भक्ति और आस्था में सराबोर नजर आए। कथा प्रवचन के दौरान प्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी गीताम्बा तीर्थ ने माता की महिमा और भक्ति के महत्व का भावपूर्ण वर्णन किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

वेदव्यास और नारद संवाद से दिया भक्ति का संदेश
कथा के दौरान साध्वी गीताम्बा तीर्थ ने महर्षि वेदव्यास और देवर्षि नारद से जुड़ा एक प्रेरक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि वेदव्यास एक समय संतान न होने के कारण अत्यंत दुखी थे। सरस्वती नदी के तट पर आराधना करते समय उन्होंने एक गौरैया के जोड़े को अपने बच्चों की सेवा करते देखा, जिससे उनका दुख और बढ़ गया।

इसी दौरान वहां पहुंचे देवर्षि नारद ने उनकी व्यथा सुनी और उन्हें श्रीमद् देवी भागवत का विधि-विधान से पारायण करने का मार्ग बताया।

माता की कृपा से मिला शुकदेव जैसा तेजस्वी पुत्र
साध्वी ने बताया कि नारद जी के मार्गदर्शन में महर्षि वेदव्यास ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ देवी भागवत का पारायण किया। उनकी साधना से प्रसन्न होकर आदिशक्ति माँ प्रकट हुईं और उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। माता की कृपा से उन्हें शुकदेव जैसे महान और विद्वान पुत्र की प्राप्ति हुई।

भक्ति से दूर होते हैं जीवन के कष्ट
कथा वाचिका ने कहा कि जब माँ भगवती अपने भक्तों पर प्रसन्न होती हैं, तो उनके जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे सच्चे मन से माता की आराधना करें और अपने जीवन को धर्म और संस्कारों से जोड़ें।

आरती और प्रसाद के साथ हुआ समापन
कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से माँ भगवती की आरती की और प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा।

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