वाल्मीकि रामायण के पाठ से गूंजा रामालयम, श्रद्धालुओं ने महर्षि वाल्मीकि को किया नमन, श्री राम तारक आंध्र आश्रम में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनी जयंती
वाराणसी। मानसरोवर स्थित श्री राम तारक आंध्र आश्रम में महर्षि वाल्मीकि जयंती श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। आश्रम परिसर स्थित रामालयम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्प अर्पित कर माल्यार्पण किया और विधिवत पूजा-अर्चना कर उन्हें नमन किया। इस दौरान पूरा परिसर भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह सात बजे वाल्मीकि रामायण के पाठ के साथ हुआ। श्री उरमिरी सोमायजुलु के शिष्यों ने श्रद्धापूर्वक रामायण का पाठ किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भी सहभागिता करते हुए महर्षि वाल्मीकि का स्मरण किया और उनके बताए आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान रामायण के प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और धर्म के संदेश को याद किया गया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया।
रामायण के रचयिता के योगदान का किया स्मरण
महर्षि वाल्मीकि को भारतीय साहित्य परंपरा में आदिकवि के रूप में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त है। उनकी रचना रामायण भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों, कर्तव्यनिष्ठा और मर्यादा का विस्तृत वर्णन करती है। रामायण ने भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उनके साहित्यिक और आध्यात्मिक योगदान को याद किया गया। श्रद्धालुओं ने उनके जीवन और रचनाओं से प्रेरणा लेते हुए धर्म, सत्य, सदाचार और मानवीय मूल्यों के महत्व पर जोर दिया। आश्रम में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति और रामायण की परंपरा से जुड़ने का अवसर मिला। पूजा-अर्चना और रामायण पाठ के दौरान भक्तों ने श्रद्धापूर्वक भाग लेकर महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में आश्रम के प्रबंध न्यासी वीवी सुंदर शास्त्री, पप्पू कृष्ण प्रसाद, विरुपाक्ष शर्मा, मारकंडे शर्मा, पप्पू नरसिम्हा मूर्ति, श्रीमती रुक्मणी देवी और सीता देवी सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आश्रम के प्रबंधक वीवी सीताराम ने किया।

