बीएचयू साइबर लाइब्रेरी हादसे पर सवाल, उच्चस्तरीय जांच और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
वाराणसी। बीएचयू परिसर में निर्माणाधीन साइबर लाइब्रेरी की छत गिरने के मामले ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में संतोष कुमार त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय के केंद्रीय सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) को शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने, भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संतोष कुमार त्रिपाठी ने अपने शिकायती पत्र में कहा कि देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय शिक्षण संस्थान में निर्माणाधीन भवन की छत का गिरना अत्यंत गंभीर मामला है। उनके अनुसार यह घटना केवल एक निर्माण दुर्घटना नहीं, बल्कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य की बात रही कि घटना के समय वहां कोई छात्र, कर्मचारी या मजदूर मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से कराई जाए और जांच पूरी होने तक निर्माण एजेंसी, ठेकेदार तथा कार्य की निगरानी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की गहन पड़ताल की जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी, तकनीकी लापरवाही, भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की कि यदि ठेकेदार दोषी पाया जाता है तो उसे तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए, ताकि भविष्य में उसे बीएचयू या अन्य सरकारी संस्थानों के निर्माण कार्यों का ठेका न मिल सके। इसके साथ ही निर्माणाधीन साइबर लाइब्रेरी का थर्ड पार्टी टेक्निकल ऑडिट कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इस घटना को सामान्य दुर्घटना मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भविष्य में सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण, नियमित तकनीकी निरीक्षण और प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि शिकायत की प्रतिलिपि बीएचयू के कुलपति और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी), नई दिल्ली को भी भेजी गई है, ताकि पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच सुनिश्चित हो सके।

