तकनीकी क्षेत्र में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दें, अनुवाद पर निर्भरता घटाएं: जीएम आशुतोष पंत
वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में सोमवार को आयोजित राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बराकास) की तिमाही बैठक में महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने अधिकारियों से तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए हिंदी में मौलिक चिंतन और लेखन को बढ़ावा देना होगा तथा अनुवाद पर निर्भरता कम करनी होगी।
हिंदी में तकनीकी लेखन की जरूरत पर दिया जोर
बरेका राजभाषा विभाग के तत्वावधान में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने कहा कि बरेका एक ओर दुनिया की आधुनिकतम तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी क्षेत्र में हिंदी के प्रयोग को भी लगातार बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने अधिकारियों को तकनीकी विषयों पर सरल और बोलचाल की भाषा में पुस्तकें लिखने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि तकनीकी ज्ञान का व्यापक प्रसार हिंदी के माध्यम से ही संभव है।

विभागों की हिंदी प्रगति रिपोर्ट पर हुई चर्चा
बैठक में विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में हिंदी के प्रयोग और राजभाषा संबंधी गतिविधियों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। साथ ही हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सुझाव भी साझा किए गए। अधिकारियों ने कार्यालयी कार्यों में हिंदी के उपयोग को और अधिक बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।
राजभाषा विभाग के प्रयासों की दी जानकारी
बैठक के प्रारंभ में मुख्य राजभाषा अधिकारी रामजन्म चौबे ने उपस्थित अधिकारियों का स्वागत किया। उन्होंने बरेका में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे रचनात्मक प्रयासों, विभिन्न प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा राजभाषा संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिंदी को कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही उपस्थिति
बैठक में प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर मनीष कुमार, प्रमुख मुख्य यांत्रिक इंजीनियर विवेक शील, प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक आलोक अग्रवाल, प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी (प्रशासन) लालजी चौधरी, प्रमुख मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश कुमार, प्रधान वित्त सलाहकार मुक्तेश मित्तल, प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त डी.के. मौर्या, मुख्य अभिकल्प इंजीनियर (डीजल) अनुराग कुमार गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

हिंदी को कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाने पर बल
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि हिंदी केवल राजभाषा के रूप में नहीं, बल्कि कार्य संस्कृति और तकनीकी ज्ञान के प्रसार के प्रभावी माध्यम के रूप में भी विकसित हो। अधिकारियों ने हिंदी में कार्य निष्पादन को और अधिक प्रोत्साहित करने तथा कर्मचारियों को इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प व्यक्त किया।
बैठक का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी यथार्थ पाण्डेय ने किया।

