वाराणसी में मांस-मछली दुकानों के विस्थापन पर सियासत तेज, 'आप' ने नगर निगम के फैसले को बताया जनविरोधी, आंदोलन का ऐलान

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वाराणसी। नगर निगम की ओर से शहर के भीतर संचालित मांस और मछली की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्तावित निर्णय को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे जनहित और आजीविका के खिलाफ बताया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा।

सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में आम आदमी पार्टी के वाराणसी जिलाध्यक्ष कैलाश पटेल ने कहा कि पार्टी नगर निगम की विरोधी नहीं है, बल्कि ऐसे निर्णयों का विरोध कर रही है जो आम जनता, छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं के हितों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि इस फैसले से हजारों मांस और मछली विक्रेताओं की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा, जबकि लाखों उपभोक्ताओं को भी आवश्यक खाद्य सामग्री के लिए अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ेगी।

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कैलाश पटेल ने कहा कि यदि लोगों को मांस और मछली खरीदने के लिए शहर से 15 से 20 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा तो इससे समय, धन और संसाधनों की अतिरिक्त बर्बादी होगी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि खरीदारी भले ही शहर के बाहर से हो, लेकिन उसका उपयोग और उपभोग शहर के भीतर ही होगा। ऐसे में उससे निकलने वाला कचरा भी शहर में ही उत्पन्न होगा, इसलिए नगर निगम का यह तर्क व्यावहारिक नहीं माना जा सकता। उन्होंने सरकार और नगर निगम की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर शहर के होटलों और रेस्तरां में मांसाहारी भोजन परोसे जाने की अनुमति है, वहीं दूसरी ओर खुदरा दुकानों को शहर से बाहर भेजने का निर्णय विरोधाभासी प्रतीत होता है।

आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर आठ प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें नगर निगम के विस्थापन संबंधी निर्णय को तत्काल वापस लेने, दुकानों को हटाने के बजाय उन्हें नियमानुसार नियमित (रेगुलेट) करने, सभी मांस एवं मछली विक्रेताओं का सर्वे कर उन्हें विधिक मान्यता और आवश्यक लाइसेंस उपलब्ध कराने जैसी मांगें शामिल हैं।

पार्टी ने घोषणा की है कि मंगलवार सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच वाराणसी नगर निगम कार्यालय पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। जिला अध्यक्ष ने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन में पार्टी के 50 से अधिक पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि उन हजारों दुकानदारों, व्यवसायियों और लाखों उपभोक्ताओं के हितों की लड़ाई है, जो नगर निगम के इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

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