अस्सी घाट पर सजा काव्य का रंग, ‘काव्यार्चन’ के 59वें सत्र में गूंजे संवेदना और सामाजिक सरोकार 

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वाराणसी। अस्सी घाट पर ‘सुबह-ए-बनारस आनंद कानन’ के काव्य प्रकल्प के अंतर्गत आयोजित ‘काव्यार्चन’ का 59वां सत्र साहित्यिक विविधता और भावनात्मक अभिव्यक्ति का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। मंगलवार को आयोजित इस सत्र में वरिष्ठ और उदीयमान रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार पंडित सूर्य प्रकाश मिश्रा ने की। अपने अध्यक्षीय काव्य पाठ में उन्होंने सरल शब्दों में गहन जीवन संदेश प्रस्तुत किए। उनकी रचना ‘रचना तुम पत्थर मत बनना, वाणी बनना स्पंदन की…’ ने सृजन की संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति की जीवंतता पर बल दिया। वहीं दूसरी रचना ‘हे चिरंतन पथिक न्यारे…’ के माध्यम से उन्होंने जीवन में संघर्ष और आस्था की शक्ति को रेखांकित किया।

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सत्र का संचालन नगर की वरिष्ठ रंगकर्मी एवं कवयित्री राजलक्ष्मी मिश्रा ने अपने प्रभावी और भावपूर्ण अंदाज में किया। कार्यक्रम की शुरुआत उदीयमान रचनाकार विदुषी सहाना के काव्य पाठ से हुई। उन्होंने आध्यात्मिकता और प्रेम के विभिन्न आयामों को अपनी रचनाओं में उकेरा। उनकी पंक्तियां ‘जब नयन से मिले तेरी दृष्टि प्रिये…’ ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

युवा रचनाकार मृत्युंजय त्रिपाठी ‘मलंग’ ने अपनी रचनाओं के जरिए सामाजिक यथार्थ को सशक्त ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी कविता में बेरोजगारी और सामाजिक विसंगतियों की पीड़ा स्पष्ट रूप से झलकी—‘डिग्री वाला वो कागज अब, बस रद्दी ही नजर आता है…’। उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा। संचालन के दौरान राजलक्ष्मी मिश्रा ‘मन’ ने भी अपनी रचनाओं से कार्यक्रम में भावनात्मक गहराई जोड़ी। उनकी पंक्तियां ‘कौन कहता है कि दौलत से ही जमाना है…’ ने जीवन के मूल्यों पर विचार करने को प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संयोजन ‘सुबह-ए-बनारस आनंद कानन’ के संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा के निर्देशन में किया गया। अतिथियों का स्वागत डॉ. नागेश शांडिल्य ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन एडवोकेट रुद्रनाथ त्रिपाठी ‘पुंज’ ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. ओमप्रकाश श्रीवास्तव ‘प्रकाश मिर्ज़ापुरी’, प्रियानाथ पांडेय, गिरीश पांडेय ‘काशिकेय’, डॉ. महेंद्र तिवारी ‘अलंकार’, प्रो. वत्सला श्रीवास्तव, डॉ. प्रतापशंकर दूबे, अरुण द्विवेदी, राजेश द्विवेदी सहित अनेक साहित्यकार और काव्य प्रेमी उपस्थित रहे।

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