मणिकर्णिका घाट पर तोड़-फोड़ के विरोध में पाल समाज का प्रदर्शन, जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित पावन मणिकर्णिका घाट में कथित तोड़-फोड़ के विरोध में सोमवार को पाल समाज सड़कों पर उतर आया। पाल विकास समिति, वाराणसी के तत्वावधान में पाल–बघेल–धनगर समाज ने प्रदर्शन कर जिलाधिकारी वाराणसी के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा और घाट की मूल संरचना की रक्षा व प्रतिमा की पुनर्स्थापना की मांग की।
आस्था और इतिहास पर आघात स्वीकार्य नहीं: समाज
ज्ञापन सौंपते हुए समाज के रामाश्रय पाल ने कहा कि मणिकर्णिका घाट लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है। जनकल्याण की भावना से निर्मित इस घाट के स्वरूप से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ समाज की आस्था और इतिहास पर सीधा आघात है, जिसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रतिमा को उसी स्थान पर भव्य रूप से स्थापित करने की मांग
समाज ने प्रशासन के समक्ष प्रमुख मांग रखते हुए कहा कि मणिकर्णिका घाट से विस्थापित लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को उसी स्थान पर सम्मानजनक और भव्य रूप में पुनः स्थापित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान और सनातन संस्कृति से परिचित हो सकें।
धरोहरों की सुरक्षा शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी
पाल–बघेल–धनगर समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर संपूर्ण सनातन हिंदू समाज की पूजनीय हैं और उनके द्वारा स्थापित तीर्थों की सुरक्षा करना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि उनकी धरोहरों के साथ अन्याय हुआ तो समाज शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को बाध्य होगा।
बड़ी संख्या में जुटे लोग, शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में पाल समाज के लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में घाट की मूल संरचना की रक्षा और प्रतिमा की पुनर्स्थापना की मांग दोहराई। समाज ने प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई, ताकि आस्था और विरासत दोनों सुरक्षित रह सकें।

