विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर गंगा तट से हरित भविष्य का संदेश, पर्यावरण संरक्षण की शपथ के साथ बांटे गए पौधे

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वाराणसी। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर मंगलवार को गंगा के उस पार स्थित डोमरी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और हरित जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, गंगा स्नानार्थियों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने प्रकृति की रक्षा, अधिक से अधिक पौधरोपण तथा गंगा की स्वच्छता बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया।

यह कार्यक्रम 137 सीईटीएफ, 39 जीआर गंगा टास्क फोर्स द्वारा आयोजित किया गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें प्रकृति के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को कदम्ब, आम, जामुन, कटहल और सैजन सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे वितरित किए गए। साथ ही उन्हें पौधों का नियमित संरक्षण, सिंचाई और देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि लगाए गए पौधे भविष्य में बड़े वृक्ष बनकर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

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कार्यक्रम का नेतृत्व सूबेदार धनेश यादव ने किया। वहीं जिला परियोजना अधिकारी दर्शन निषाद ने उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाते हुए कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या अभियानों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में पर्यावरण के अनुकूल आदतों को अपनाए, जल का संरक्षण करे, अधिक से अधिक पौधे लगाए और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करे, तो पृथ्वी को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और सभ्यता की जीवनरेखा है। करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ गंगा लाखों लोगों की आजीविका और पर्यावरणीय संतुलन का भी आधार है। इसलिए गंगा की स्वच्छता, उसके तटीय क्षेत्रों का संरक्षण और जैव विविधता की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।

वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे अपने घर, मोहल्ले और गांव में पौधरोपण को जन अभियान का स्वरूप दें तथा प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव बन सकते हैं। कार्यक्रम में नमामि गंगे गंगा विचार मंच के जिला संयोजक शिवम अग्रहरि, नेमी स्नानार्थियों, स्थानीय नागरिकों, युवाओं तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में अधिक से अधिक पौधे लगाने, गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने तथा प्रकृति संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का भी आह्वान किया।

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