नव संवत्सर की पूर्व संध्या पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शक्ति आराधना, स्त्रोत पाठ और भक्ति संगीत से भक्तिमय हुआ वातावरण 

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वाराणसी। नव संवत्सर की पूर्व संध्या पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में मां दुर्गा के पूजन-अर्चन का दिव्य एवं भव्य आयोजन श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। दीनदयाल उपाध्याय कौशल केन्द्र के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे परिसर को वैदिक ऊर्जा, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना से सराबोर कर दिया।

आयोजन में वैदिक मंत्रोच्चार, धूप-दीप की सुगंध और भक्तिमय वातावरण ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बना दिया। माँ दुर्गा की आराधना के दौरान स्तोत्र-पाठ और भक्ति संगीत से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने उद्बोधन में भारतीय नव संवत्सर के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह केवल नए वर्ष का प्रारंभ नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, नव-संकल्प और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएं। उनके अनुसार, माँ दुर्गा की उपासना व्यक्ति को शक्ति, धैर्य, मर्यादा और धर्मनिष्ठा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

कार्यक्रम का सफल आयोजन दीनदयाल उपाध्याय कौशल केन्द्र के निदेशक प्रो. विधु द्विवेदी के निर्देशन में हुआ। इस दौरान आयोजित वैदिक पूजन, स्तोत्र-पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया और नव संवत्सर के स्वागत का शुभ संदेश दिया।

इस अवसर पर कुलसचिव राकेश कुमार सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से प्रो. रामपूजन पाण्डेय, प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. महेन्द्र पाण्डेय, प्रो. राजनाथ, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा, प्रो. अमित कुमार शुक्ल, डॉ. रविशंकर पाण्डेय, रीना प्रसाद, नीलू पटेल, शशि पांडेय और मृदुला मिश्रा समेत अन्य गणमान्य जनों ने पूजन में भाग लेकर आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

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