वाराणसी के हरदत्तपुर में आने-जाने को सड़क नहीं, बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं ग्रामीण

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- जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पारकर आवागमन करते हैं गांव के लोग
- बीमार पड़ने पर गांव में नहीं पहुंच पाती एंबुलेंस, चारपाई पर मरीज पहुंचते हैं अस्पताल 
- वाराणसी-प्रयागराज हाईवे के समीप स्थित गांव की 600 से अधिक है आबादी
- ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव में वोटिंग का किया था बहिष्कार, मिला था आश्वासन


वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के हरदत्तपुर गांव में आने-जाने के लिए सड़क नहीं है। वाराणसी-प्रयागराज हाईवे के समीप स्थित 600 से अधिक आबादी वाले इस गांव के ग्रामीण आजादी के 77 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक को पार करते हुए आवागमन करने को विवश हैं। इससे हादसों के शिकार भी होते हैं। सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव में वोटिंग का बहिष्कार किया था। उस दौरान सड़क बनवाने का आश्वासन देकर यहां के वाशिंदों का वोट तो ले लिया गया, लेकिन सड़क निर्माण को लेकर कोई पहल नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश गहराता जा रहा है। 

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ग्रामीणों ने किया था वोटिंग का बहिष्कार
रोहनिया विधानसभा का हरदत्तपुर के ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव के दौरान सड़क की मांग को लेकर वोटिंग का बहिष्कार कर दिया था। सूचना के बाद अधिकारी पहुंचे तो पता चला कि गांव में जाने के लिए सड़क नहीं है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि चुनाव के बाद उनकी इस समस्या को दूर किया जाएगा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने मतदान किया। वहीं चुनाव के एक महीना बीतने के बाद अधिकारियों के आश्वासन के अनुसार कोई कार्य प्रगति पर नहीं दिख रहा है। ग्रामीण अजय गौतम ने बताया कि इसे लेकर एसडीएम से संपर्क किया गया, तो उन्होंने  चुनाव के समय में नया निर्माण न होने का हवाला दिया। लगातार अधिकारियों को अपनी समस्या से अवगत करवाते आ रहे हैं, लेकिन सालों बाद भी कोई ग्रामीणों की समस्या का सुध लेने वाला नहीं है।

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रेलवे ट्रैक पार कर आवागमन करने को विवश हैं ग्रामीण
गांव में आवागमन के लिए कोई मार्ग न होने से ग्रामीण रेलवे ट्रैक पार कर आते-जाते है। स्थानीय सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि रेलवे ट्रैक पार करते समय कई बार ट्रेन की चपेट में ग्रामीण आ जाते है। कई ग्रामीण अब तक रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान अपनी जान गंवा चुके है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने वैकल्पिक तौर पर रेलवे ट्रैक के नीचे बने एक सूख चुके तलाब की पुलिया का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि बारिश होने के बाद यह वैकल्पिक मार्ग बंद हो जाता है। ऐसे में मजबूरन सभी को रेलवे ट्रैक को पार कर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार गांव से कुछ दूरी पर हरदत्तपुर रेलवे स्टेशन है और वहां रेलवे के द्वारा अंडरपास बनाया जा रहा है, लेकिन गांव से अंडर पास तक जाने के लिए लिंक मार्ग नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि उनके गांव में किसी कारणवश अंडरपास नहीं बन सकता तो हरदत्तपुर रेलवे स्टेशन के पास वर्तमान में जो अंडरपास बन रहा है, उससे गांव को रास्ते से जोड़ा जाए। रेलवे के पास खुद की ज़मीन है। 

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महिलाओं ने पीएम मोदी से लगाई गुहार
हरदत्तपुर गांव में सड़क न होने से सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है। महिलाओं के अनुसार गांव के पुरुष खेतों से होकर आवागमन कर लेते है, लेकिन महिलाओं को रेलवे ट्रैक ही पार करना होता है। गांव की रेखा देवी और रेनू देवी बताती है, कि गांव में यदि को बीमार होता है तो एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। बीमार व्यक्ति को चारपाई पर लेटाकर रेलवे ट्रैक पार करवाने के बाद अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि सड़क न होने से चारपाई से अस्पताल पहुंचने में काफी समय लग जाता है। ग्रामीणों ने पीएम मोदी से गुहार लगाई है, कि उनकी इस समस्या को संज्ञान लेते हुए इसे शीघ्र दूर करें।

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