BHU में पेड़ों की कटाई पर NGT सख्त, पांच पक्षों को भेजी नोटिस
वाराणसी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में कथित पेड़ कटाई के मामले में सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई में अधिकरण ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय सहित पांच पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को तय की गई है।
दो सदस्यीय पीठ, जिसमें चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद शामिल थे। उन्होंने यह आदेश याचिकाकर्ता अधिवक्ता सौरभ तिवारी द्वारा दायर निष्पादन याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। सुनवाई में अधिवक्ता तिवारी ने वर्चुअल माध्यम से अपना पक्ष रखते हुए बताया कि गत वर्ष 11 अगस्त को एनजीटी ने बीएचयू को अवैध रूप से पेड़ों की कटाई का दोषी पाया था।
उन्होंने कहा कि उस आदेश में बीएचयू को निर्देश दिया गया था कि जितने पेड़ काटे गए हैं, उसके बदले 20 गुना अधिक वृक्षारोपण किया जाए। साथ ही, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि जमा करने का भी आदेश दिया गया था। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन महीने के भीतर क्षतिपूर्ति राशि का आकलन कर उसकी वसूली सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ता के अनुसार, अब तक इन निर्देशों का समुचित अनुपालन नहीं किया गया है। न तो बीएचयू द्वारा निर्धारित अनुपात में वृक्षारोपण किया गया और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने क्षतिपूर्ति राशि का आकलन कर वसूली की प्रक्रिया पूरी की। इस पर नाराजगी जताते हुए एनजीटी ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और वन विभाग (डीएफओ) सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब सभी की निगाहें 7 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि पूर्व आदेशों का पालन किस हद तक हुआ है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

