बीएचयू में ‘नवसर्जना’ कला प्रदर्शनी का शुभारंभ, 30 युवा कलाकारों की रचनात्मकता का अनूठा प्रदर्शन
वाराणसी। बीएचयू के दृश्य कला संकाय में ‘नवसर्जना’ कला प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। इसमें बीएफए प्रथम वर्ष के 30 छात्र-छात्राओं की मौलिक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया। यह प्रदर्शनी युवा कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा को प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। प्रदर्शनी में पहुंचे कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने छात्रों की रचनात्मकता को सराहा।
प्रदर्शनी का उद्घाटन कला इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. ज्योति रोहिल्ला राणा और भारत कला भवन के उप-निदेशक डॉ. निशांत द्वारा किया गया। इस अवसर पर दृश्य कला संकाय की प्रमुख प्रो. उत्तमा दीक्षित की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुरेश चंद्र जांगिड़ ने किया। यह प्रदर्शनी 6 से 8 अप्रैल तक अहिवासी कला वीथिका में आयोजित की गई है, जहां कला प्रेमी प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक इन कलाकृतियों का अवलोकन कर सकते हैं।

‘नवसर्जना’ का उद्देश्य नवागंतुक छात्र-कलाकारों को अपनी रचनात्मकता अभिव्यक्त करने का अवसर देना है, विशेष रूप से जलरंग माध्यम के जरिए। छात्रों ने अपनी कृतियों में तकनीकी दक्षता और कलात्मक समझ का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। कई कलाकारों ने प्रकाश और छाया के प्रभावशाली संयोजन के माध्यम से चित्रों को जीवंत बनाया है, जबकि कुछ ने भारत कला भवन संग्रहालय की प्राचीन मूर्तियों से प्रेरणा लेकर सूक्ष्म और बारीक चित्रण प्रस्तुत किया है।
प्रदर्शनी में अनुपम शर्मा ने अपने पोर्ट्रेट के माध्यम से मानवीय भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से उकेरा, वहीं निरुपम राय ने वॉटरकलर लैंडस्केप में बारीकियों को खूबसूरती से दर्शाया। नम्रता पाल ने ‘एंटीक स्टडी’ के जरिए प्राचीन कला के प्रति अपनी रुचि को प्रदर्शित किया। इस प्रदर्शनी में अंजलि गुप्ता, शौविक, सुमित, पीयूष, सतीश, अंजलि विश्वकर्मा, सूरज, शिवाजी, अंकिता, कीर्ति, तनु, श्रेया, आलोक, साक्षी, पूजा, शिवराज, सोनू, अंजलि यादव, आर्यन, प्रिवेश, प्रगति, सपना, चांदोसाकी, कंचन, अंकित, रवि और हर्ष सहित कई प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं शामिल हैं। खास बात यह है कि इन कलाकृतियों को छात्रों ने अपने नियमित शैक्षणिक कार्यों के अतिरिक्त समय निकालकर तैयार किया है।
कार्यक्रम में व्यवहारिक कला विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनीष अरोड़ा, मूर्ति कला विभाग के अध्यक्ष प्रो. ब्रह्म स्वरूप, कला इतिहास के प्रो. शांति स्वरूप सिन्हा, डॉ. महेश सिंह, डॉ. अमरेश कुमार, डॉ. मिथुन कुमार दत्ता, श्री साहेब राम टुडू और डॉ. सुनील कुमार पटेल सहित कई शिक्षकों और कला प्रेमियों ने भाग लिया। सभी ने छात्रों के उत्साह और प्रतिभा की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

