IIT (BHU) और व्रिए यूनिवर्सिटेट एम्स्टर्डम के बीच हुआ MoU, SDGs पर हिंदू दृष्टिकोण विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) में बुधवार को “SDGs पर हिंदू दृष्टिकोण: VUCA-BANI विश्व में आध्यात्मिक देखभाल” विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। मानविकी अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी नीदरलैंड्स के व्रिए यूनिवर्सिटेट एम्स्टर्डम के सहयोग से ABLT-4 सभागार में आयोजित की गई। उद्घाटन सत्र में देश-विदेश के विद्वानों, आध्यात्मिक चिंतकों और शिक्षाविदों ने सहभागिता कर वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में हिंदू दार्शनिक परंपराओं की प्रासंगिकता पर गहन विचार-विमर्श किया।
मालवीय जी को श्रद्धांजलि के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों के मंचासीन होने, स्वागत-सत्कार तथा संस्थान के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। आयोजन में आध्यात्मिकता और शिक्षा के समन्वय को केंद्र में रखते हुए संवाद की शुरुआत की गई।

VUCA-BANI विश्व में हिंदू जीवन-दृष्टि की उपयोगिता
मुख्य अतिथि श्री आदिनारायण वेंकटचलम ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू जीवन-दृष्टि, जो धर्म, अनुकूलनशीलता और आंतरिक संतुलन पर आधारित है, आज वैश्विक स्तर पर मार्गदर्शक सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान VUCA (अस्थिरता, अनिश्चितता, जटिलता और अस्पष्टता) तथा BANI (भंगुरता, चिंता, गैर-रेखीयता और अव्याख्येयता) विश्व व्यवस्था में भारतीय दार्शनिक परंपराएँ एक स्थायी और सशक्त वैचारिक आधार प्रदान करती हैं।
मूल्य-आधारित नेतृत्व पर बल
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्थान के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि रामायण और महाभारत जैसे हिंदू महाकाव्यों ने उनके व्यक्तित्व और बौद्धिक विकास पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने कहा कि आईआईटी (बीएचयू) जैसे संस्थानों की जिम्मेदारी केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की दार्शनिक विरासत पर आधारित मूल्य-आधारित नेतृत्व का निर्माण करना भी उतना ही आवश्यक है।
IIT (BHU) और व्रिए यूनिवर्सिटेट के बीच MoU
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण क्षण IIT (BHU) और व्रिए यूनिवर्सिटेट एम्स्टर्डम के मध्य समझौता ज्ञापन (MoU) का औपचारिक आदान-प्रदान रहा। यह समझौता भारत और नीदरलैंड्स के बीच आध्यात्मिकता, धर्मशास्त्र और मानविकी अध्ययन के क्षेत्र में शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देगा।
समकालीन चुनौतियों के समाधान की ओर पहल
यह संगोष्ठी सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हिंदू दृष्टिकोण और आध्यात्मिक देखभाल के परिप्रेक्ष्य में पुनर्परिभाषित करने का एक महत्वपूर्ण बौद्धिक प्रयास है। इसके माध्यम से भारत की दार्शनिक परंपराओं को समकालीन वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु एक सशक्त संसाधन के रूप में पुनर्स्थापित करने की दिशा में सार्थक पहल की गई है।

