IIT-BHU में ‘मेड-टेक संवाद’: तकनीक और चिकित्सा के मेल से बदलेगी स्वास्थ्य सेवा की तस्वीर

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वाराणसी। स्वास्थ्य सेवा में तकनीक की बढ़ती भूमिका और चिकित्सा विज्ञान के साथ उसके समन्वय पर केंद्रित ‘मेड-टेक संवाद’ ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में इलाज सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल सिस्टम और उन्नत तकनीकों के सहारे ज्यादा सटीक, सुलभ और किफायती बनेगा। यह उच्चस्तरीय शैक्षणिक एवं शोध संवाद शुक्रवार को एनी बेसेंट लेक्चर थिएटर (ABLT), आईआईटी (बीएचयू) में आयोजित हुआ, जिसमें बीएचयू और आईएमएस-बीएचयू के शिक्षाविदों व विशेषज्ञों ने भाग लिया।

महामना को नमन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इस अवसर पर शिक्षा, राष्ट्र-निर्माण और सामाजिक उत्थान में उनके दूरदर्शी योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।

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अंतर्विषयक शोध पर जोर
अतिथियों का स्वागत करते हुए आईआईटी (बीएचयू) के अधिष्ठाता (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि आज की जटिल सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान तभी संभव है, जब चिकित्सा विज्ञान और आधुनिक प्रौद्योगिकी एक साथ मिलकर काम करें। उन्होंने अंतर्विषयक अनुसंधान को समय की आवश्यकता बताया।

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बीएचयू–आईआईटी सहयोग से समाज को मिलेगा लाभ
अपने उद्घाटन वक्तव्य में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने बीएचयू और आईआईटी (बीएचयू) के बीच मजबूत सहयोगात्मक ढांचे को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे संवाद और कार्यक्रम दोनों संस्थानों के संयुक्त शैक्षणिक एवं शोध प्रयासों को नई दिशा देते हैं, जिनका सीधा लाभ समाज और राष्ट्र को मिलता है।

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किफायती और सुलभ स्वास्थ्य समाधान पर फोकस
आईएमएस-बीएचयू के निदेशक प्रो. सत्य नारायण संखवार ने कहा कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच घनिष्ठ सहयोग जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आईएमएस-बीएचयू इस दिशा में हर संभव सहयोग करेगा, ताकि आम जनता तक किफायती और सुलभ स्वास्थ्य समाधान पहुंच सकें।

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डॉ. देवी शेट्टी का बड़ा संदेश: तकनीक से बदलेगा इलाज
मुख्य अतिथि, पद्म भूषण से सम्मानित प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ और नारायणा हेल्थ के संस्थापक डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी ने ऑनलाइन उद्घाटन व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स, एआई आधारित निदान और उन्नत मेडिकल तकनीकें स्वास्थ्य सेवा को समयबद्ध, सटीक और मरीज-केंद्रित बना रही हैं। डॉ. शेट्टी ने मेडिकल टेक्नोलॉजी में नवाचार के लिए शिक्षाविदों और चिकित्सकों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

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शैक्षणिक ढांचे और शोध पारिस्थितिकी तंत्र की जरूरत
आईएमएस-बीएचयू के अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. संजय गुप्ता और अधिष्ठाता (अनुसंधान) प्रो. गोपाल नाथ ने मेड-टेक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए संरचित शैक्षणिक कार्यक्रमों और मजबूत शोध पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता बताई।

चैलेंज ग्रांट की घोषणा
समापन वक्तव्य में आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि चिकित्सा और प्रौद्योगिकी का सहयोग स्वदेशी तकनीक के विकास, किफायती स्वास्थ्य समाधान और भारतीय संस्थानों की वैश्विक पहचान को मजबूत करेगा। उन्होंने ऐसे सहयोगात्मक शोध को बढ़ावा देने के लिए चैलेंज ग्रांट की घोषणा भी की।

संवादात्मक सत्र में भविष्य की राह पर चर्चा
कार्यक्रम के अंत में आयोजित संवादात्मक सत्र में संकाय सदस्यों ने मेडिकल टेक्नोलॉजी अनुसंधान से जुड़ी चुनौतियों, अवसरों और भविष्य की दिशा पर गहन चर्चा की। नए सहयोगों की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। पूरे कार्यक्रम का समन्वय प्रो. रुचिर गुप्ता ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. प्रदीप पाइक द्वारा प्रस्तुत किया गया।

नवाचार के जरिए बेहतर स्वास्थ्य सेवा का संकल्प
‘मेड-टेक संवाद’ ने यह स्पष्ट कर दिया कि बीएचयू, आईआईटी (बीएचयू) और आईएमएस-बीएचयू मिलकर नवाचार और तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि व्यापक सामाजिक हित की प्रभावी पूर्ति हो सके।

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