पिंडरा तहसील की व्यवस्था पर अधिवक्ताओं में आक्रोश, फाइलें गायब होने और भ्रष्टाचार के आरोप

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नवागत एसडीएम के कार्यभार संभालने के बाद कामकाज प्रभावित होने का दावा, दलालों और बाहरी लोगों की सक्रियता पर भी उठाए सवाल

वाराणसी। पिंडरा तहसील की कार्यप्रणाली को लेकर अधिवक्ताओं और फरियादियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अधिवक्ताओं ने तहसील की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राजस्व और न्यायिक कार्यों के निस्तारण में नियमों की अनदेखी हो रही है। उनका दावा है कि महत्वपूर्ण मुकदमों की फाइलें और दस्तावेज भी गायब हो रहे हैं, जिससे वादकारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसील परिसर में बाहरी लोगों और कथित भूमाफियाओं की सक्रियता बढ़ गई है। उनका कहना है कि ऐसे लोगों के प्रभाव के कारण न्यायालय से संबंधित फाइलों के रखरखाव पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिवक्ताओं ने दावा किया कि कई महत्वपूर्ण फाइलें बिना स्पष्ट जानकारी के गायब होने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे संबंधित मुकदमों की सुनवाई और निस्तारण प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

जनसुनवाई और फाइल निस्तारण में देरी का आरोप
अधिवक्ताओं ने तहसील के अंदर और बाहर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आम फरियादियों को अपने काम के लिए कई बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। राजस्व मामलों, जनसुनवाई और फाइलों के निस्तारण में कथित देरी से लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।

नवागत एसडीएम के कार्यभार संभालने के बाद स्थिति और खराब होने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ताओं ने तहसील की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि कार्यालयों में दलालों की सक्रियता पर रोक लगनी चाहिए और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन से फाइलों के गायब होने के आरोपों की जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और आम लोगों की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने की मांग की है।

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