110 साल से जीवंत है खोजवां की नक्कटैया, रामायण के प्रसंगों संग झलकती है काशी की विरासत

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गांधी चौक पर उमड़ता है लाखों दर्शकों का हुजूम, लाग-विमान, सजीव झांकियां और बनारसी नगाड़े बढ़ाते हैं आयोजन की रौनक

वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में सदियों पुरानी परंपराएं आज भी जनमानस की आस्था और उत्साह के साथ जीवंत हैं। इन्हीं परंपराओं में भेलूपुर क्षेत्र के गांधी चौक, खोजवां बाजार की ऐतिहासिक नक्कटैया का विशेष स्थान है। करीब 110 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा धार्मिक आस्था, लोककला और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम है। हर वर्ष इस आयोजन को देखने के लिए शहर के विभिन्न इलाकों के साथ दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, नक्कटैया के दौरान लाखों की भीड़ जुटती है और पूरा क्षेत्र मेले की रौनक से सराबोर हो उठता है।

शूर्पणखा प्रसंग पर आधारित है आयोजन
खोजवां की नक्कटैया का मुख्य आधार रामायण का वह प्रसंग है, जिसमें वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण पंचवटी में निवास करते हैं। इसी दौरान राक्षसी शूर्पणखा भगवान श्रीराम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है। बाद में लक्ष्मण द्वारा उसकी नाक काटे जाने की घटना कथा को नया मोड़ देती है। इसी प्रसंग को केंद्र में रखकर नक्कटैया में धार्मिक झांकियों और पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से रामायण की कथा को सजीव रूप दिया जाता है।

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लाग-विमान और बनारसी नगाड़ों की गूंज
नक्कटैया की सबसे बड़ी विशेषता इसके पारंपरिक लाग-विमान और आकर्षक झांकियां हैं। स्थानीय कलाकार अपनी मेहनत, कल्पनाशीलता और हुनर से ऐसे दृश्य तैयार करते हैं, जो दर्शकों को आकर्षित करते हैं। धार्मिक प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियों के साथ सामाजिक विषयों को भी झांकियों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाता है। बनारसी नगाड़ों की गूंज, पात्रों की पारंपरिक वेशभूषा और रात में निकलने वाला जुलूस आयोजन की भव्यता को और बढ़ा देता है।

धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक चेतना
खोजवां की नक्कटैया केवल मनोरंजन या धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का माध्यम भी रही है। झांकियों के जरिए समय-समय पर समाज से जुड़े मुद्दों और जनजागरूकता के संदेशों को प्रस्तुत किया जाता है। इससे नई पीढ़ी को धार्मिक कथाओं, पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है।

पीढ़ियों से कायम है परंपरा
समय के साथ आयोजन के स्वरूप और प्रस्तुतियों में बदलाव आया है, लेकिन लोगों की आस्था और उत्साह आज भी बरकरार है। स्थानीय नागरिकों, आयोजकों और कलाकारों के सामूहिक प्रयासों से यह परंपरा आगे बढ़ रही है। करीब 110 वर्षों से अधिक की यात्रा पूरी कर चुकी खोजवां की नक्कटैया आज भी काशी की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देती है। गांधी चौक पर सजने वाला यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ ही शहर की समृद्ध लोकपरंपरा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

BK Pathak
BK Pathak

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Beerkeshwar Pathak Journalist Beerkeshwar Pathak, who entered the field of journalism in 2015, has nearly a decade of experience in print and digital media. He holds a postgraduate diploma in journalism and has established his reputation through reporting at prestigious media outlets like Amar Ujala, Hindustan, and Dainik Jagran. He has a special interest and expertise in reporting on political and social issues, news analysis, and editing, along with eventful news. He currently serves as an editor at Live VNS, a leading digital news platform in Varanasi. In this role, he is contributing to reshaping digital journalism and delivering important information to readers through factual and reliable news. Factual investigation of news and effective editing are key aspects of his journalism.

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