काशी विद्यापीठ में जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि, इतिहास से सीख लेने पर जोर
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के इतिहास विभाग में सोमवार को जलियांवाला बाग हत्याकांड की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर नरसंहार में शहीद हुए वीर सपूतों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके बलिदान को याद करते हुए इतिहास से सीख लेने का संदेश दिया गया।
स्वतंत्रता संग्राम भौतिक से वैचारिक संघर्ष की ओर बढ़ा
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. जयवीर सिंह धनकड़ (इतिहास एवं पुरातत्व विभाग, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक) ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल भौतिक संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैचारिक आंदोलन के रूप में भी विकसित हुआ। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने इस संघर्ष को दबाने के लिए रौलट एक्ट जैसे दमनकारी कानून लागू किए, जिसके विरोध में अमृतसर के जलियांवाला बाग में शांतिपूर्ण सभा हो रही थी, जहां अंग्रेज अधिकारी द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी कर हजारों निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई।

इतिहास देता है भविष्य का मार्गदर्शन
मानविकी संकाय के अध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्रा ने कहा कि भारतीय इतिहास हमारे लिए मार्गदर्शक है। यह हमारे अतीत का दर्पण है, जो वर्तमान को समझने और भविष्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। उन्होंने छात्रों से इतिहास के प्रति जागरूक रहने और उससे प्रेरणा लेने की अपील की।
इतिहास को संजोकर रखने की आवश्यकता
अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद शंकर चौधरी ने कहा कि चाहे हम किसी भी स्थिति में हों, हमें अपने इतिहास को कभी नहीं भूलना चाहिए। इतिहास हमें निरंतर सीख देता है और हमें अपने मूल्यों से जोड़े रखता है।
कई प्राध्यापक और छात्र रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजना वर्मा ने किया। इस अवसर पर प्रो. नंदिनी सिंह, प्रो. पीतांबर दास, प्रो. रामाश्रय यादव, डॉ. विजय कुमार रंजन, रिया मिश्रा, मुस्कान पटेल सहित कई शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे।

