काशी : श्री सतुआ बाबा आश्रम में श्रावणी महोत्सव : हेमाद्रि स्नान, सप्तऋषि पूजन और भंडारे के साथ मनाया गया पावन पर्व
वाराणसी। श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर काशी के पवित्र मणिकर्णिका घाट स्थित श्री सतुआ बाबा आश्रम में जगद्गुरु विष्णुस्वामी मुख्य आचार्य पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु विष्णुस्वामी संप्रदायाचार्य श्री संतोषाचार्य सतुआ बाबा जी महाराज के सान्निध्य में भव्य श्रावणी महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वैदिक परंपरा के अनुसार गंगा स्नान, हेमाद्रि संकल्प, दशविध स्नान, सप्तऋषि पूजन और भगवान शालिग्राम जी का पूजन संपन्न हुआ। सैकड़ों श्रद्धालुओं, ब्राह्मणों और साधु-संतों ने इस पावन अनुष्ठान में भाग लिया।
आयोजन का शुभारंभ सुबह 7:30 बजे श्री विश्वनाथ कॉरिडोर के भैरव द्वार गंगा तट पर हुआ। यहां श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान कर हेमाद्रि संकल्प पूजन किया। हेमाद्रि स्नान (दशविध स्नान) हिंदू धर्म में प्रायश्चित और विशेष शुद्धि के लिए किया जाने वाला महत्वपूर्ण विधान है, जिसमें दस पवित्र द्रव्यों का उपयोग किया जाता है।

हेमाद्रि स्नान (दशविध स्नान) की विधि
इस स्नान में मुख्य रूप से भस्म (राख), मृत्तिका (मिट्टी), गोमय (गोबर), पंचगव्य, गोरज (गाय के पैरों की धूल), धान्य, कुश का जल, तिल और दूध-मधु आदि दस पवित्र वस्तुएं शामिल होती हैं। ये पदार्थ शरीर की बाह्य और आंतरिक शुद्धि के साथ-साथ ज्ञात-अज्ञात पापों के प्रायश्चित के लिए माने जाते हैं।

लेपन की प्रक्रिया के अनुसार स्नान करते समय प्रत्येक वस्तु को बायीं हथेली पर रखकर थोड़ा जल मिलाकर दोनों हाथों से मिलाया जाता है। इसके बाद निर्धारित मंत्रों का उच्चारण करते हुए बायें हाथ से कमर के नीचे के अंगों पर और दायें हाथ से कमर के ऊपर के अंगों पर उस पदार्थ का लेपन किया जाता है। इस विधि से शरीर के विभिन्न भागों को पवित्र किया जाता है, जिसके बाद गंगा स्नान पूरा होता है।
यह विधान विशेष रूप से श्रावणी उपाकर्म के अवसर पर किया जाता है, जब ब्राह्मण समाज वर्ष भर के कर्मों का प्रायश्चित कर नया यज्ञोपवीत धारण करता है।
गंगा तट पर संकल्प और स्नान के बाद श्रद्धालु आश्रम पहुंचे। सुबह 10:30 बजे श्री सतुआ बाबा आश्रम में सप्तऋषि पूजन और भगवान शालिग्राम जी का विधिवत पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सप्तऋषियों का आह्वान कर उनका पूजन किया गया तथा शालिग्राम जी की विशेष आराधना हुई। इस दौरान आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।

दोपहर 1:00 बजे भंडारा प्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। आश्रम की ओर से सभी को सादर आमंत्रित किया गया था।
श्री सतुआ बाबा आश्रम मणिकर्णिका घाट पर विष्णुस्वामी संप्रदाय की प्राचीन पीठ है। वर्तमान पीठाधीश्वर श्री संतोष दास जी महाराज (सतुआ बाबा) के नेतृत्व में यह आश्रम वैदिक परंपराओं, सेवा और अध्यात्म का केंद्र बना हुआ है। श्रावणी महोत्सव यहां हर वर्ष श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया जाता है।

इस आयोजन से काशी की प्राचीन वैदिक परंपरा जीवंत हुई। श्रद्धालुओं ने बताया कि हेमाद्रि स्नान और सप्तऋषि पूजन से न केवल शरीर बल्कि मन की भी शुद्धि होती है तथा वर्ष भर के दोषों का प्रायश्चित हो जाता है। आश्रम प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सनातन संस्कृति को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

