शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर से गंगाजल लेकर निकली भव्य शोभायात्रा, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती के मार्गदर्शन में सहस्त्र चंडी महायज्ञ का शुभारंभ
वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन में सहस्त्र चंडी महायज्ञ का भव्य शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ हुआ। देश-विदेश में रहने वाले सनातनी हिंदुओं की दैवीय आपदाओं से रक्षा, राष्ट्र की सुख-शांति, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना से आयोजित महायज्ञ आगामी 20 दिनों तक चलेगा।

महायज्ञ के शुभारंभ पर सुबह आठ बजे शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर से गंगाजल के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सैकड़ों श्रद्धालु हाथों में कलश लेकर शोभायात्रा में शामिल हुए। धार्मिक जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निकली शोभायात्रा आदि शंकराचार्य महासंस्थानम आश्रम पहुंचकर संपन्न हुई। इसके बाद विधि-विधान से महायज्ञ की पूजन प्रक्रिया शुरू की गई।
33 कोटि देवताओं का आवाहन कर शुरू हुआ अनुष्ठान
यज्ञ मंडप में सर्वप्रथम वरुण पूजन, गंगा पूजन और कलश पूजन संपन्न कराया गया। इसके बाद पंचांग पूजन एवं ब्राह्मण वरण हुआ। षोडश मातृका, नवग्रह और क्षेत्रपाल सहित 33 कोटि देवताओं का आवाहन, स्थापना एवं विधिवत पूजन किया गया। पूजन के बाद सहस्त्र चंडी दुर्गा सप्तशती पाठ का शुभारंभ हुआ। दुर्गा सप्तशती का पाठ आगामी 20 दिनों तक अनवरत जारी रहेगा।

शक्ति उपासना में निहित है लोककल्याण की भावना: शंकराचार्य
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। मां भगवती की आराधना और वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से लोककल्याण, राष्ट्र की उन्नति, सुख-शांति और संपूर्ण मानव समाज के मंगल की कामना की जाती है। सहस्त्र चंडी महायज्ञ भी इसी लोककल्याण की भावना को समर्पित है।
उन्होंने कहा कि इस अनुष्ठान के माध्यम से सनातन समाज की रक्षा के साथ राष्ट्र की समृद्धि और विश्व शांति की मंगलकामना की जा रही है।
36 विद्वान ब्राह्मण करा रहे यज्ञीय अनुष्ठान
यज्ञाचार्य तेजमणि त्रिपाठी के नेतृत्व में 36 विद्वान ब्राह्मणों की देखरेख में यज्ञीय अनुष्ठान संपन्न कराया जा रहा है। वैदिक मंत्रोच्चार और दुर्गा सप्तशती के पाठ से आदि शंकराचार्य महासंस्थानम का पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा।

इस अवसर पर स्वामी बृजभूषणनंद सरस्वती, सच्चिदानंद त्रिपाठी, विनय कुमार मिश्रा, रामकुमार मिश्र, क्षमा शंकर उपाध्याय, पन्नालाल मिश्र, बाबूलाल मुंदर, अविनाश शुक्ल, जय प्रकाश तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजकों के अनुसार, आगामी 20 दिनों तक चलने वाले सहस्त्र चंडी महायज्ञ में विभिन्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। महायज्ञ के माध्यम से सनातन समाज की रक्षा, दैवीय आपदाओं से जनमानस की सुरक्षा, राष्ट्र की समृद्धि तथा संपूर्ण विश्व में सुख-शांति की कामना की जाएगी।

