विश्व मातृभाषा दिवस पर काशी विद्यापीठ में अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कविता महोत्सव, भारत-रूस के विद्वानों और विद्यार्थियों ने साझा किया भाषाई प्रेम

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वाराणसी। विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग द्वारा एक भव्य अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कविता महोत्सव का आयोजन किया गया। यह आयोजन Russian State University for the Humanities तथा Kutafin Moscow State Law University के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भारत और रूस के विद्वानों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मातृभाषा संरक्षण पर दिया गया विशेष बल
कार्यक्रम का शुभारंभ रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमैनिटीज के इंटरनेशनल सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज के निदेशक अलेक्जेंडर स्टोल्यारोव के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने मातृभाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल देते हुए इसे सांस्कृतिक पहचान का आधार बताया।

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गिरजानंद चौधरी विश्वविद्यालय, गुवाहाटी के कुलपति प्रोफेसर कर्णपा दास ने अपने वक्तव्य में कहा कि मातृभाषा व्यक्ति की संवेदनाओं, संस्कृति और आत्मपहचान की जड़ होती है। वहीं, रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी की हिंदी विभाग की प्रोफेसर प्रो. इंदिरा ने हिंदी और रूसी भाषाओं के बीच बढ़ते अकादमिक सहयोग की सराहना की।

“निज भाषा उन्नति अहै…” की गूंज
अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग की अध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरज धनकड़ ने भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियों “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल” का उल्लेख करते हुए मातृभाषा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा न केवल ज्ञान का माध्यम है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का सशक्त साधन भी है।

विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रस्तुति ने बांधा समां
कार्यक्रम में रूसी भाषा के विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों तथा अंग्रेजी साहित्य के स्नातकोत्तर छात्रों ने हिंदी, भोजपुरी सहित अपनी-अपनी मातृभाषाओं में स्वरचित कविताओं का पाठ किया। साथ ही हिंदी के प्रसिद्ध कवियों—मैथिलीशरण गुप्त, हरिवंश राय बच्चन और भारतेंदु हरिश्चंद्र-की रचनाओं का प्रभावशाली वाचन किया गया।

सुंदरी मौर्या, प्रियाशी यादव, प्रियाशी मिश्रा, कामना प्रजापति, अनुराग यादव, आदित्य गुप्त, निधि गुप्ता, निखिल, साक्षी, छाया, वर्तिका, आयुषी, कौशिकी, आरती, सूरज और स्वाति सहित अनेक विद्यार्थियों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।

रूस के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों ने भी अपनी मातृभाषाओं में कविताओं का पाठ कर कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया।

भाषाई विविधता और वैश्विक सहयोग का उदाहरण
यह अंतरराष्ट्रीय कविता महोत्सव भाषाई विविधता, सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण साबित हुआ। विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए एक यादगार और प्रेरणादायी अनुभव बन गया।

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